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वसुंधरा राजे के लिए आनंद पाल बना आफत

वसुंधरा राजे के लिए आनंद पाल बना आफत
एस.पी.मित्तल ( वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रसिद्द ब्लॉगर )
Thursday, August 9, 2018 - 14:13
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8 अगस्त को राजस्थान के जाट बाहुल्य जिले नागौर के कुचामन शहर में बड़ी संख्या में जाट समुदाय के लोग जुटे और स्वाभिमान रैली निकाल कर डीएसपी विद्या प्रकाश मूड के तबादले पर वसुंधरा सरकार को चेताया। रैली के दौरान जाट महासभा के बैनर तले हुई सभा में जाट समाज के प्रमुख नेताओं ने कहा कि वसुंधरा राजे के पिछले पांच वर्ष के शासन में जाट समुदाय के अधिकारियों को प्रताड़ित किया गया है। कई जाट अफसरों के नामों का उल्लेख कर बताया गया कि किस प्रकार रातों रात हटाया गया। कुचामन के डीएसपी विद्या प्रकाश मूड ने क्षेत्र में अपनी जान जोखिम में डालकर क्षेत्र के अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की, लेकिन वसुंधरा सरकार ने उन्हें एपीओ कर दिया जो सरकार की जाट विरोधी नीति को उजागर करता है। आज इस सभा में जितनी बड़ी संख्या में जाट समुदाय एकत्रित हुआ है उससे मुख्यमंत्री को अंदाजा लगा लेना चाहिए। होना तो यह चाहिए था कि कुचामन के भाजपा विधायक विजय सिंह चौधरी इस सभा में आते और यही से मुख्यमंत्री से फोन पर बात कर विद्या प्रकाश के तबादले को निरस्त करवाते। जाट समुदाय के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि जाट विरोधी नीति में बदलाव नहीं किया तो नवम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे और भाजपा को जोरदार सबक सिखाया जाएगा। 

नागौर राजनीतिक माहौल गर्मायाः

जाट समुदाय की स्वाभिमान रैली से नागौर का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जिले भर के जाटों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया है। विधानसभा चुनाव से पहले स्वाभिमान रैली जाट राजनीति में महत्व रखती है। सभा में कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। नागौर जिले में 10 विधानसभा क्षेत्रों में से 9 पर भाजपा के विधायक हैं तथा नागौर के सांसद सीआर चौधरी केन्द्रीय मंत्री हैं।

असल में आनंदपाल का एनकाउंटर वसुंधरा सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। इस एनकाउंटर की वजह से ही राजपूत रावणा राजपूत समाज पहले ही सरकार से नाराज चल रहा है। लोकसभा के उपचुनावों में भाजपा की हार में राजपूत-रावणा राजपूत समाज की भूमि मानी जा रही है। यह समाज एनकाउंटर को फर्जी बता रहा है, अब इस एनकाउंटर की जांच सीबीआई कर रही है। जानकार सूत्रों के अनुसार गत 31 जुलाई को सीबीआई ने एनकाउंटर वाले स्थान पर सीन रीक्रिएशन करवाया था। चूंकि एनकाउंटर के समय विद्या प्रकाश कुचामन के डीएसपी थे, इसलिए सीबीआई ने उन्हें भी बुलाया। लेकिन 26 जुलाई को पिता के निधन की वजह से विद्या प्रकाश सीन रीक्रिएशन में भाग लेने नहीं जा सके। इसके बाद 6 अगस्त को सरकार ने विद्या प्रकाश को कुचामन से हटा कर एपीओ कर दिया। एपीओ के विरोध में जब जाट समुदाय ने स्वाभिमान रैली की घोषणा की तो 7 अगस्त को ही सरकार ने विद्या प्रकाश की नियुक्ति जयपुर स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में कर दी। लेकिन अब जाट समुदाय विद्या प्रकाश का एपीओ वाला आदेश निरस्त करवाना चाहता है। ताकि एक बार उन्हें फिर से कुचामन का डीएसपी बनाया जा सके। यानि आनंदपाल के एनकाउंटर में फिलहाल राज्य सरकार जाट समुदाय और राजपूत-रावणा राजपूत समाज के बीच उलझ गई है। असल में सरकार ने शुरू से ही सूझबूझ के तरीके से इस मामले को नहीं निपटाया। 

" कुचामन में हुई रैली और ट्रेनिंग सेंटर में हुई नियुक्ति पर 8 अगस्त को जब विद्याप्रकाश से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया। उन्होंने फिलहाल इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से मना किया है। "

दो आईपीएस पर भी गिर चुकी है गाजः

आनंदपाल के एनकाउंटर से जुड़े नागौर के एसपी परिस अनिल देशमुख और चूरू के एसपी राहुल बारहट पर भी गाज गिरी है। देशमुख को झुंझुनू तथा बारहट को जयपुर कमिश्नरेट में डीएसपी ईस्ट नियुक्त किया गया था, लेकिन जोइन करने से पहले ही देशमुख को जयपुर मुख्य में क्राइम ब्रांच तथा बारहट को बीकानेर स्थित आरएसी में नियुक्ति दे दी। यानि इन दोनों ही आईपीएस अफसरों से फील्ड पोस्टिंग छीन ली गई।