11/7/2019 5:00:33 AM

आखिर क्यों 1 साल तक टॉयलेट को मंदिर समझकर प्रणाम करते रहे लोग

हमीरपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी सरकार के सत्ता में आते ही सरकारी इमारतों, स्कूलों और बसों को भगवा रंग में रंगने का सिलसिला भी शुरू हुआ. इसी क्रम में हमीरपुर (Hamirpur) में सरकारी इमारतों और स्कूलों के आलावा एक शौचालय (Toilet) को भी भगवा रंग (Orange Colour) में रंग दिया गया. इसके बाद जो हुआ वह चौंकाने वाला था. टॉयलेट की बनावट व भगवा रंग होने की वजह से वहां से होकर गुजरने वाले लोग इसे मंदिर (Temple) समझकर प्रणाम तक करने लगे. यह सिलसिला एक साल तक चला. जैसे ही यह खबर पूरे कस्बे में फैली तो नगर पालिका के अधिकारियों ने टॉयलेट का रंग भगवा से बदलकर गुलाबी कर दिया.

मामला 
हमीरपुर जिले के मौदहा सीएचसी का है, जहां नगर पालिका ने एक साल पहले शौचालय का निर्माण करवाया था. इस शौचालय को नगर पालिका और सीएचसी के ठेकदारों ने भगवा रंग में रंग दिया था. इसका उद्घाटन बाकायदा मौदहा एसडीएम अजीत परेश और चेयरमैन रामकिशोर ने किया था, लेकिन दूर से यह शौचालय भगवा रंग की वजह से मंदिर के जैसा दिखाई देता था. ऐसे में सीएचसी में पहुंचने वाले लोग व मरीज इस शौचालय को मंदिर समझकर प्रणाम करने लगे, लेकिन गांव के लोगों को यह नहीं पता होता था कि यह शौचालय है. जब वह पास से देखते थे तो शौचालय देख हंसी का पात्र भी बनते थे. यही सिलसिला एक साल तक चलता रहा.

 

hamirpur toilet
साल भर बाद टॉयलेट का रंग बदला गया
 



स्थानीय दुकानदार हनी सिंह कहते हैं, ' मेरी दूकान टॉयलेट के सामने हैं. आने जाने वाले लोग इसके भगवा रंग की वजह से मंदिर समझकर प्रणाम करते थे. अब इसे गुलाबी रंग में रंग दिया गया है.'


चेयरमैन ने ठेकेदार की लापरवाही बताया


उधर जब भगवा रंग की वजह से शौचालय को मंदिर समझने की बात सामने आई तो नगर पालिका के चेयरमैन ने शौचालय का रंग बदलवा दिया. जिससे अब वह शौचालय जैसा दिखाई देने लगा है. नगर पालिका के चेयरमैन रामकिशोर ने कहा कि इस टॉयलेट का निर्माण एक साल पहले करवाया गया था. लेकिन ठेकेदार की लापरवाही की वजह से इसका रंग भगवा कर दिया गया. जिससे लोग धोखे से मंदिर समझकर प्रणाम करने लगे. जब इसकी सूचना मिली तो मैंने इसका निरीक्षण किया और इसका रंग गुलाबी करवा दिया गया है.

सीएचसी ठेकेदार सादिक ने बताया कि टॉयलेट का निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने सरकार के अधिकारियों को खुश करने के लिए इसका रंग भगवा कर दिया था. जिसके बाद लोग इसे मंदिर समझने लगे थे. जब स्थानीय लोगों और पत्रकारों के द्वारा नगर पालिका चेयरमैन को सूचना मिली तो इसे अब गुलाबी करवा दिया गया है.