1/8/2019 11:41:20 AM

गन्ना किसानों का धरना प्रदर्शन, कलेक्टर के आश्वासन पर उठे

नरसिंहपुर,मध्यप्रदेश। सोमवार को पूर्व घोषणा अनुसार गन्ना किसानों ने तीन सूत्रीय मांग को लेकर नरसिह भवन के समक्ष हल्ला बोला। जिसमें करीब 4 घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। सभी प्रदर्शनकारी कलेक्टर से सीधी बात करने के बाद धरने से उठे और अब भोपाल में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। किसानों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि, हमें नेतागिरी नही करनी हैं। हमारा शोषण हो रहा हैं, जिसकी वजह से हम अपना हक पाने के लिए संघर्ष करने मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि, हमें न्याय मिल गया होता तो हमें प्रशासन की चौखट पर खून बहाने की जरूरत नही पड़ती।

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सोमवार को एक बार फिर कलेक्ट्रेट पहुंचे आक्रोशित गन्ना किसानों ने न सिर्फ कलेक्ट्रेट गेट पर लंबा धरना देते हुए जमकर नारेबाजी की बल्कि पोर्च पर बने खंभों व दीवारों पर अपने खून से मांगों की इबारत लिख डाली। जिसमें गन्ने के दाम 350 रूपये प्रति कि्ंवटल किये जाने सहित अन्य मांगें उल्लेखित की गयीं थीं। इसके पूर्व 1 जनवरी को भी गन्ना किसानों ने कलेक्टर को स्मरण पत्र सौंपा था, जिसमें रिकव्हरी के आधार पर गन्ने का दाम दिलाये जाने, भुगतान की एक मुश्त राशि 15 दिनों में दिलायी जाने। 

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कांग्रेस सरकार द्वारा वचनपत्र में उल्लेखित प्रति कि्ंवटल गन्ना पर 50 रूपये का बोनस दिये जाने,  नियमानुसार मिलों में गन्ना ट्राली 12 घंटे के भीतर खाली करायी जाने सहित अन्य मांगें की गयीं थीं। तब गन्ना किसानों के आक्रोश को देखते हुए कलेक्टर दीपक सक्सेना ने  तुरंत 8 सुगर मिलों के संचालकों को नोटिस जारी कर 7 जनवरी को जवाब सहित पेशी पर बुलाया था, 7 जनवरी आयी तो किसान भी यह जानने कलेक्ट्रेट पहुंच गये कि सुगर मिल संचालकों ने क्या जवाब दिये? और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गयी? पर   प्रमुख सचिव की वीडियो कांन्फ्रेंसिंग में व्यस्त कलेक्टर शाम करीब पौने 5 बजे किसानों से मिल पाये।  

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अपर कलेक्टर के विरूद्व लगे नारे -

दोपहर करीब डेढ़ बजे रैली के रूप में गन्ना हाथ में लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान  कलेक्टर के इंतजार में पोर्च पर बैठ गये। कुछ ही देर में अपर कलेक्टर जे समीर लकरा वहां पहुंचे तो अपर कलेक्टर को एक किसान ने अपने साथी अधिकारी से यह कहते हुए सुन लिया कि ...यह बीमारी फिर शुरू हो गयी। कथित रूप से अपर कलेक्टर किसानों के इस आंदोलन को बीमारी बता रहे थे। किसान ने जब यह बात अपने साथियों को बतायी तो सभी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने  अपर कलेक्टर से बात करने से इंकार करते हुए एडीएम वापस जाओ के नारे लगाने शुरू कर दिये। विरोध व आक्रोश को भांपते हुए अपर कलेक्टर जे समीर लकरा कलेक्ट्रेट भवन के भीतर चले गये। करीब 4 घंटे बाद जब कलेक्टर दीपक सक्सेना नीचे आकर किसानों से मिले तो किसान उनकी कुछ बातों से संतुष्ठ दिखे तो कुछ से असंतुष्ठ। 

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14 दिन के भीतर करवाऊंगा भुगतान -

किसानों की मांगें कलेक्टर के संज्ञान में थीं, लिहाजा उन्होंने नीचे आकर किसानों का माइक थामते हुए कहा कि अभी कुछ मिलों के प्रतिनिधि पेशी पर आये हैं, मैं उनके प्रकरणों की सुनवाई करूंगा। गन्ना के विषय में निर्णय लेने का पूरा अधिकार गन्ना आयुक्त के पास होता है, बावजूद इसके मैं आश्वस्त करता हूं कि कलेक्टर के रूप में मेरे पास जो सीमित अधिकार हैं उनका मैं पूरी तरह किसान हित में उपयोग करूंगा। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कहा कि रेट को लेकर मेरे हाथ बंधे हुए हैं, लेकिन गन्ना किसानों का भुगतान 14 दिन के भीतर होना चाहिए इसकी जवाबदारी मेरी है। यदि मिल संचालक इस अवधि में भुगतान नही करते हैं तो उन्हें किसानों को साढ़े 7 प्रतिशत ब्याज देना होगा। यदि उन्होंने इससे भी कन्नी काटी तो उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जायेगी। गन्ने के दाम को लेकर दीपक सक्सेना ने कहा कि 10 जनवरी को गन्ना आयुक्त सभी मिल संचालकों की बैठक ले रहे हैं उसमें आपकी बात पहुंचा दी जायेगी।

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10 जनवरी को विधानसभा घेरेंगे किसान -

किसान नेता विनायक परिहार ने बताया कि गन्ना किसानों के अधिकारों को लेकर  किया जा रहा आंदोलन जारी रहेगा। इस क्रम में 10 जनवरी को विधानसभा का घेराव किया जायेगा। आंदोलन के दौरान विनायक परिहार, महंत प्रीतमपुरी गोस्वामी, जगमोहन मरैया, अरविंद शर्मा, , रमाकांत धाकड़, गौतम पटैल, धनंजय शर्मा, कुंजबिहारी यादव,  मुकेश मरैया, आनंद राजपूत, संदीप राव, नेपाल सिंह राजपूत, महेंद्र तिहैया, राजेश राजपूत, मेघराज राजपूत, महेंद्र कौरव, रोहित ढ़िमोले, मोहरकांत पटैल, रामती बाई,रमाकांत परिहार,   अखिलेश तिहैया, दीपेन्द्र तिवारी, मनोज राजपूत, धनराज सिह,  मोहरकांत गुजर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।  

संवादाता आकाश कौरव