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जाने हिन्दू धर्म में विवाह के बारे में

ज्योतिषचार्य निष्ठा शर्मा द्वारा ...  
विवाह के लिए सभी जगह धर्म अर्थ काम मोक्ष 4 फैरै दिए जाते हैं कई जगह पौराणिकता के आधार पर सात फेरे दिए जाते हैंसात फेरे दिए जाते हैं विवाह बंधन के बाद पूर्व जन्म के कर्म यह किसी जन्म के बुरे कर्म के बाद शुभ अशुभ कर्मों काफल हमें भुगतना पड़ता है ऐसी स्थिति में पूजा-पाठ दान जो किया जाता है वही हमारी रक्षा करता है शास्त्रों द्वारा अनिष्टकारी नक्षत्रों में विवाह न करें जो अरिष्ट नक्षत्र है अश्विनी भरणी कृतिका आद्रा पुनर्वस पुष्य अष्लेषा तीनों पूर्वा चित्रा विशाखा जेष्ठा श्रवण धनिष्ठा शतभिषा नक्षत्रों को विवाह के लिए शुभ नहीं माना गया ज्योतिष रत्न के अनुसार कृतिका भरणी आर्द्रा पुनर्वसु अष्लेषा भरणी कृतिका इन नक्षत्रों में विवाह करने पर कन्या 6 माह में विधवा होने के योग बनते हैं पुष्य नक्षत्र में विवाहित और अपनी पत्नी का परित्याग करके दूसरी स्त्री से शादी रचा जाता है

 चित्रा विशाखा जेस्ठा तीनों पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र तलाक के कारण बनता है विशाखा नक्षत्र में विवाहित कन्या अपने पति का त्याग करके दूसरे पति से दूसरा विवाह कर लेते हैं या गुपचुप तरह से यौन संबंध स्थापित करती है अश्विनी श्रवण धनिष्ठा पति पत्नी में मनमुटाव करके कठिनाइयां पैदा होती है अशोक नक्षत्रों में किया गया विवाह 10 वर्ष में विधवा या विदुर बना देता है विवाह मुहूर्त में नक्षत्रों के अलावा लग्न का मार्गदर्शन उचित लेना आवश्यक है 

तूल वृश्चिक लग्न दिन में मकर एवं धनु लग्न में बधीर मेष वृषभ लग्न दिन में बजधीर कन्या मिथुन कर्क रात्रि में बधीर होते हैं यह अंधा होता है कुंभ लग्न दिन में मीन लग्न रात्रि में पंगु होते हैं मधुर संगीत रात्रि में विवाह करने से दरिद्रता पैदा होती है जन्मजात वर वधु दरिद्र बनने रहते हैं अंधक लगना हो तो वैधव्य अगर यह लग्न रात्रि को हो तो संतान की मृत्यु के योग बनते हैं विवाह जीवन भर सुख शांति के लिए किया जाता है विवाह के लिए तिथि लगना नक्षत्र सूर्य चंद्र बृहस्पति बली होना आवश्यक विद्वान पंडित द्वारा इसका निर्धारण किया जाना आवश्यक रहता है गुरु अस्त शुक्र अस्त होलाष्टक जिस नक्षत्र में सूर्य ग्रहण हो या जिस नक्षत्र में चंद्र ग्रहण हो उस नक्षत्र में 6 महीने तक विवाह वर्जित है