अब वेटिंग ई-टिकट वाले भी कर सकेंगे ट्रेन में सफर,सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

अब वेटिंग ई-टिकट वाले भी कर सकेंगे ट्रेन में सफर,सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत
Published Date:
Saturday, June 2, 2018 - 18:45

नई दिल्ली। भारतीय रेल में सफर करने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। अगर आप भी वेटिंग ई-टिकट की वजह से ट्रेन में कई बार यात्रा करने से चूक गए हैं तो अब ऐसा नहीं होगा। वेटिंग ई-टिकट वाले यात्री भी अब ट्रेन में सफर कर सकेंगे।

इतना ही नहीं कंफर्म टिकट वाले मुसाफिरों के नहीं आने की सूरत में वेटिंग ई-टिकट वाले यात्री खाली सीट के लिए दावा जता सकेंगे।

रेलवे ने एक फैसले के खिलाफ, सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज करते हुए ई-टिकट पर यात्रा करने वाले मुसाफिरों को बड़ी राहत दी है। दरअसल रेलवे ने उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें काउंटर से वेटिंग टिकट और ई-टिकट से यात्रा करने वाले मुसाफिरों के बीच भेदभाव को खत्म करने के हाई कोर्ट ने उसे निर्देश दिए थे।

क्या होता था अब तक ई- वेटिंग टिकिट पर

अभी तक ऐसा होता था कि, वेटिंग ई-टिकट वाले मुसाफिर ट्रेन में सफर नहीं कर पाते थे, जबकि रिजर्वेशन काउंटर से लिए गए वेटिंग टिकट वाले यात्री ट्रेन में सफर करने के साथ ही किसी यात्री के नहीं आने की सूरत में उसकी सीट पाने के हकदार भी थे।

रेलवे नही कर पाया पैरवी

जस्टिस मदन बी लोकुर की सिंगल बेंच ने 2014 में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ रेलवे की अपील को खारिज कर दिया। वो भी इसलिए क्योंकि रेलवे की तरफ से कोई वकील इस मामले पर बहस के लिए कोर्ट नहीं पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, "इस मामले की दो बार सुनवाई हुई। मगर याचिकाकर्ता की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। इसलिए स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया गया।" ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद अब रेलवे को दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को अमल में लाना होगा औj ऐसे विकल्प तलाशने होंगे, जिससे ई-टिकट और काउंटर से खरीदे गए वेटिंग टिकटों वाले मुसाफिरों के बीच चल रहा भेदभाव खत्म हो सके।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ये कहा

जुलाई 2014 के अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को ये निर्देश दिया था कि, ई-टिकट से यात्रा करने वाले मुसाफिरों को इससे कोई नुकसान न हो। दरअसल विभाष कुमार झा नाम के एक वकील की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रेलवे को ये निर्देश दिए थे कि वो 6 महीने के भीतर इस खामी को दूर करे और साथ में ये भी मुकम्मल करें कि, एजेंट्स टिकट ब्लॉक न कर पाएं और काउंटर से टिकट खरीदने वाले मुसाफिर एजेंट्स को ज्यादा पैसा चुकाकर कंफर्म टिकट न खरीदें।

अपना आदेश जारी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि, "कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो काउंटर से खरीदे गए वेटिंग लिस्ट टिकट वाले को ई-टिकट पर प्राथमिकता देता हो। अगर काउंटर से वेटिंग लिस्ट टिकट खरीदने वाले मुसाफिरों को ट्रेन में चढ़ने का मौका मिलता है और कंफर्म टिकट वाले मुसाफिर के नहीं आने पर सीट भी मिलती है तो वेटिंग ई-टिकट वालों को भी इस सुविधा से वंचित नहीं किय़ा जा सकता है। फिर चाहें आरक्षण का फाइनल चार्ट भी भले जारी हो गया हो।”

अब सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद रेलवे को ये फर्क खत्म करने के काम में जुटना होगा।