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राफेल पर मची रार ,जनता सच जानने को बेकरार

राफेल पर मची रार ,जनता सच जानने को बेकरार
Thursday, October 11, 2018 - 12:36
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हिंदुस्तान की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा धमाका-रॉफेल डील पर फ्रांस की वेबसाइट का बहुत बड़ा खुलासा-रॉफेल के सौदे के लिए रिलायंस के नाम की ही रखी गई थी शर्त राफेल डील पर देश में मचे सियासी घमासान के बीच फ्रांस की वेबसाइट मीडियापार्ट ने दावा किया है कि दसॉल्ट के सामने राफेल डील के लिए रिलायंस के साथ सौदे की शर्त रखी गई थी. वेबसाइट ने दावा किया है कि दसॉ के प्रतिनिधि ने अनिल अंबानी की कंपनी में दौरा किया तो सैटेलाइट इमेज से पता चला कि वहां सिर्फ एक वेयर हाउस था, इसके अलावा किसी तरह की कोई सुविधा मौजूद नहीं थी.
वेबसाइट की ओर से जारी किए गए दस्तावेजों की मुताबिक फ्रेंच कंपनी दसॉ के सामने अनिल अंबानी के कंपनी रिलायंस के साथ राफेल डील करने की शर्त रखी गई थी और इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं दिया गया था. दसॉ एविएशन के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने नागपुर में दोनों कंपनियों के स्टाफ के सामने प्रेजेंटेशन देते वक्त यह बात साफ तौर पर कही थी. मीडियापार्ट ने अपने दस्तावेज में यह दावा किया है.
दसॉ के डिप्टी सीईओ ने यह बयान 11 मई 2017 को नागपुर में दिया था. हालांकि जब मीडियापार्ट की ओर से इस बारे में दसॉ कंपनी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने इस दस्तावेज की बातों को सिरे से खारिज करते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था.
कुछ दिन पहले ही फ्रेंच वेबसाइट ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से लिखा था कि राफेल डील के लिए भारत सरकार की ओर से अनिल अंबानी की रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया था. दसॉ एविएशन कंपनी के पास कोई और विकल्प नहीं था. ओलांद का कहना था कि भारत सरकार की तरफ से ही रिलायंस का नाम दिया गया था. इसे चुनने में दसॉ की भूमिका नहीं है.
ओलांद का इंटरव्यू छापने वाली मीडिया पार्ट के अध्यक्ष एडवे प्लेनले ने  इस मामले में कहा था कि डील को लेकर ओलांद बिल्कुल स्पष्ट हैं. उन्होंने डील के वक्त अनिल अंबानी की मौजूदगी को लेकर भारत सरकार से सवाल किए थे. भारत सरकार की ओर से इस मामले में रिलायंस को जबरन थोपा गया था. पहले करार 100 से ज्यादा विमान को लेकर था, लेकिन बाद में भारत सरकार ने 36 विमानों पर सहमति जताई.

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