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मैजिकब्रिक्स उपभोक्ता सर्वेक्षण ने किया खुलासा, 67% घर खरीदार महसूस करते हैं कि जीएसटी ने उनके खरीद के निर्णय को किया प्रभावित 

मैजिकब्रिक्स उपभोक्ता सर्वेक्षण ने किया खुलासा, 67% घर खरीदार महसूस करते हैं कि जीएसटी ने उनके खरीद के निर्णय को किया प्रभावित 
Friday, October 5, 2018 - 12:07
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नोएडा: भारतीय रियल एस्टेट में माल और सेवा कर को लागू किए जाने के कारण घरेलू खरीदार काफी प्रभावित किया है। मैजिकब्रिक्स के एक ग्राहक सर्वेक्षण में 67 घरेलू खरीदारों का कहना था कि पिछले एक वर्ष के दौरान कर नीति ने उनके घर खरीदने के निर्णय को प्रभावित किया है क्योंकि अब अधिकांश ग्राहक निर्माणाधीन संपत्तियों के बजाय रेडी-टू-मूव-इन संपत्तियों को खोज रहे हैं।

भारत की नंबर 1 प्रॉपर्टी साइट, मैजिकब्रिक्स के उपभोक्ता सर्वेक्षण में उत्तर देते हुए उपभोक्ता इस बात को लेकर स्पष्ट थे कि कर खरीद के निर्णय को प्रभावित करते हैं। वर्तमान में किसी खरीदार को कोई रेडी-टू-मूव-इन प्रॉपर्टी खरीदते समय कोई जीएसटी नहीं चुकानी पड़ती है जबकि निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए व्यक्ति को 12 कर चुकाना पड़ता है। 50 लाख रुपए कीमत के एक घर पर जीएसटी का शुल्क 6 लाख रुपए तक होगा। इस कर के कारण बहुत से लोगों ने निर्माणाधीन संपत्तियों के बजाय रेडी-टू-मूव-इन इकाइयों का विकल्प चुना जबकि पहले निर्माणाधीन संपत्तियों को एक सस्ता विकल्प माना जाता था।

यहां तक कि ऋण-संबद्ध सब्सिडी योजना लाभों वाली निर्माणाधीन संपत्ति को खरीदने के लिए 8ः जीएसटी लागू होता है। इसलिए सीएलएसएस लाभों वाले 50 लाख रुपए के एक किफायती घर पर 4 लाख रुपए का जीएसटी लगेगा। जीएसटी का प्रभाव उपभोक्ताओं के सर्च ट्रेंड पर भी पड़ा क्योंकि मैजिकब्रिक्स के आंकड़े दर्शाते हैं कि जनवरी-जून 2018 की तिमाही में लगभग 80 प्रतिशत लोगों ने रेडी-टू-मूव-इन संपत्तियों के लिए खोज की जबकि केवल 20 प्रतिशत के आस-पास लोगों ने ही निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए खोजबीन की।

इस रूझान पर टिप्पणी करते हुए ई जयश्री कुरुप, संपादक, मैजिकब्रिक्स ने कहा, ‘आज उपभोक्ता एक ऐसा अंतिम प्रयोक्ता है जो रहने के लिए घर ढूंढ रहा है। घर की कीमत में कमी कर सकने वाली किसी भी छूट को उपभोक्ता लपक लेते हैं। काम पूरा हो चुके घरों पर जीएसटी में छूट के साथ सरकार ने रेडी-टू-मूव-इन और निर्माणाधीन श्रेणियों की कीमतों में अंतर पैदा कर दिया है। ज्यादातर लोगों के जीवन की सबसे बड़ी खरीद होने के कारण रियल एस्टेट पर बचत का उपभोक्ताओं द्वारा हमेशा स्वागत किया जाता है। मैजिकब्रिक्स के आंकड़े अपने उपयोग के लिए घरों की कीमतों को कम करने की उपभोक्ताओं की मांग का समर्थन करते हैं’।

संपत्ति की कीमत और जीएसटी के अलावा उपभोक्ता को स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी अदा करने होते हैं जो अब राज्य लेवियां होने के कारण जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। दूसरी ओर संपत्ति कर एक म्यूनिसिपल लेवी है। डेवलपर बिक्री को बढ़ाने के लिए हाउसिंग क्षेत्र हेतु जीएसटी दरों को कम किए जाने के लिए अभियान चलाते रहे हैं। जब जीएसटी दरें घोषित की गई थीं, रियल एस्टेट के लिए प्रारंभिक दरें 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत थीं। इन्हें अब संशोधित करके किफायती आवासों के लिए 8 प्रतिशत और आवासों के अन्य सेगमेंट के लिए 12 प्रतिशत कर दिया गया है।

1947 के बाद से जीएसटी भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े सुधार के साथ-साथ रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक गेम चेंजर साबित हुआ है। इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी। जीएसटी ने उत्पाद शुल्क, प्रतिकारी शुल्क और सेवा कर जैसे केंद्रीय करों के साथ-साथ मूल्य वर्दि्धत कर, चुंगी और प्रवेश शुल्क, स्थानीय निकाय शुल्क, लग्जरी कर आदि जैसे राज्य करों का स्थान लिया।

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