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राजस्थान: पुलिस की धमकी देकर प्रदेश में हो रही ऑनलाइन ठगी

राजस्थान: पुलिस की धमकी देकर प्रदेश में हो रही ऑनलाइन ठगी
Tuesday, September 11, 2018 - 14:13
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जयपुर  : टेक्नोलॉजी जिस तेजी से देश में पैर पसार रहा है उसी गति से ऑनलाइन फ्रॉड भी बढता जा रहा है। हर 2 से 4 महीनों में ऑनलाइन ठगी के तरीकों में बदलाव हो जाता हैं। पुलिस एक मामले को समझने की कोशीश करती हैं, उससे पहले है शातिर जालसाज नये तरीके से लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बना लेते हैं। लेकिन इस बार तो इन शातिर ठगों ने पुलिस को भी नहीं छोड़ा। पुलिस के नाम से ही फर्जी मेल आई डी बनाकर लोगों को ठगना शुरु कर दिया है।

देश में कभी एटीएम हैक करके ठगी की जाती है, तो कभी बेरोजगारों को ऑनलाइन तरीके से झांसा देकर उन्हे शिकार बनाया जाता है। लेकिन इस बार शातिर बदमाशों ने नया तरीका ईजाद कर लिया है। इस बार ये बदमाश पुलिस का नाम लेकर ही लोगों के साथ ठगी कर रहे है। शहर के वाहन चालकों को अलग अलग मेल आईडी से यातायात पुलिस की ओर से जुर्माने के संदेश मिल रहे है।ठगों के द्वारा इन मेल के जरिये लोगों पर यातायात नियम तोड़ने का आरोप लगाया जाता है। जेल भेजने की धमकी भी दी जाती है। साथ ही जेल से बचने के लिए जुर्माना भरने को कहा जाता है। जिसके बाद आम जनता पुलिस के डर और बिना किसी पूछताछ के ठगों के अकाउंट में जुर्माने की राशि जमा करवा देते हैं।

किस तरह से करते हैं वारदात

खबर के मुताबिक ठग ट्रैफिक पुलिस की मेल आईडी से मिलती जूलती मेल आईडी से मेल भेजेते है। ये मेल सिर्फ जयपुर के निवासियों को जाते है। मेल में यातायात नियम तोड़ने की बात कही जाती है। जिसमें नियम तोड़ने वालों को जुर्माना के कहा जाता है। जुर्माना नही भरने पर जेल भेजने की धमकी भी होती है। मेल में ही नीचे जुर्माना भरने का लिंक दिया जाता है। लिंक पर क्लिक करते ही फर्जी अकाउंट सामने आ जाता है। और चालक उस अकाउंट में राशी भेजकर ठगी का शिकार हो जाता है।

कैसे हुआ खुलासा

शहर वासियों के पास जब मेल के जरिये ट्रैफिक चालान आने लगे तो कुछ लोगों ने ऑनलाइन जमा करवा दिये। लेकिन कुछ लोग चालान जमा करवाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के कार्यालय पहुंच गये। जब पुलिसकर्मियों ने फर्जी चालान देखा तब जाकर मामला उजागर हुआ।जिसके बाद जनता को सतर्क करते हुए ट्रैफिक डीसीपी  लवली कटियार ने कहा कि 'जुर्माने के संबंध में यातायात पुलिस की ओर से वाहन चालकों को ईमेल नहीं किया जाता है। वाहन चालकों को उनके जुर्माने के नोटिस डाक से भेजे जाते है। इस तरह के ईमेल पर चालक विश्वास ना करें'।