राजस्थान में इस बार घमासान कांग्रेस-भाजपा में नहीं बल्कि वसुंधरा-भाजपा में होगा

राजस्थान में इस बार घमासान कांग्रेस-भाजपा में नहीं बल्कि वसुंधरा-भाजपा में होगा
Published Date:
Tuesday, May 29, 2018 - 15:42

जयपुर । राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से नहीं बल्कि प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से ही है। पढ़ने में ये लाइनें चकित भले ही कर सकती हैं, लेकिन प्रदेशाध्यक्ष को लेकर जारी खेमेबंदी की सियासत ने पार्टी को इसी राह पर लाकर खड़ा कर दिया है। विधानसभा चुनाव की रणनीतियों को बनाने की बजाए पार्टी का प्रदेश से लेकर दिल्ली तक का अमला प्रदेशाध्यक्ष के भंवर में फंसा पड़ा है।

राज्य में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होना है। ऐसे में आमतौर पर पार्टियां चुनावी रणनीति को बनाने और उसे साधने में जुट जाती हैं, लेकिन प्रदेश भाजपा में इस बार चुनावी तैयारियों से ज्यादा पसंदीदा प्रदेशाध्यक्ष बनाने की तरफ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का ध्यान है। प्रदेशाध्यक्ष को लेकर खेमेबंदी की सियासत पिछले 45 दिन से जारी है। खेमेबंदी की इस राजनीति ने पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी असमंजस में डाल रखा है।

कौन बनेगा प्रदेशाध्यक्षः संगठन महामंत्री चंद्रशेखर की अरुण चतुर्वेदी के घर बंद कमरे में हुई सियासी मंत्रणा

जानकारों की मानें तो भाजपा के भीतर जिस तरह से गुटबाजी जारी है, उससे यह तय है कि इस बार पार्टी को विधानसभा चुनाव के दौरान नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, भाजपा की यह कलह कांग्रेस के लिए वरदान भी साबित हो सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा में प्रदेशाध्यक्ष की सियासत का असर विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर प्रचार-प्रसार तक पर पड़ेगा।

राजस्थान में जाट बनाम राजपूत होना तय, कांग्रेस-भाजपा की बदौलत

यदि वसुंधरा की मनमाफिक प्रदेशाध्यक्ष की ताजपोशी नहीं होती है तो राजे का पार्टी के विपरीत हर कदम भाजपा की परेशानी बढ़ा सकती है। मसलन राजे चुनाव के ऐन मौके पर पार्टी के विपरीत राह पर चली तो राज्य में दोबारा सत्ता में आने की आस लगाए भाजपा के सामने बिना कांग्रेस से मुकाबला किए ही बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।