अमित शाह, ओम माथुर, वी.सतीश...बडे़-बड़े दिग्गज घेराबंदी कर रहे हैं लेकिन अभिमन्यु की तरह डटी हुई है वसुंधरा

अमित शाह, ओम माथुर, वी.सतीश...बडे़-बड़े दिग्गज घेराबंदी कर रहे हैं लेकिन अभिमन्यु की तरह डटी हुई है वसुंधरा
Published Date:
Tuesday, May 29, 2018 - 15:51

जयपुर । राज्य में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की ताजपोशी पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों के लिए गले की फांस बन चुकी है। पसंद और नापसंद की इस सियासत के बीच पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से पिछले एक माह से दांव पर दांव चला जा रहा है, लेकिन कोई निर्णय होता दिखाई नहीं दे रहा है।

मोदी-शाह की पसंद केंद्रीय राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की लॉबिंग करते हुए ओम माथुर, वी.सतीश, चंद्रशेखर जैसे दिग्गज पिछले एक माह से अधिक समय से सरकार की आंतरिक घेराबंदी में जुटे हैं, जिससे शेखावत के इस पद पर बैठने का रास्ता साफ हो सके। वहीं, मुख्यमंत्री वसुंधरा भी इस सियासी मैदान में अभिमन्यू की तरह डटी हुई हैं और केंद्र के हर दांव को रोक रही हैं। पहले वसुंधरा राजे दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करते हुए शेखावत के नाम पर सीधे तौर पर असहमति जता चुकी हैं। वहीं. अब वापस शेखावत का नाम आने पर राजे ने अरूण चतुर्वेदी के नाम को आगे रखकर मामले को वापस उलझाकर रख दिया है।

दरअसल इस साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते प्रदेशाध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। कारण यह है कि चुनाव में टिकट बंटवारे के दौरान पार्टी में प्रदेशाध्यक्ष की राय महत्वपूर्ण रहेगी। इसे देखते हुए ही पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व गजेंद्र शेखावत के नाम पर अड़ा हुआ है। वहीं, वसुंधरा इस नाम पर तैयार नहीं होकर अपने चहेते नेताओं में से किसी को इस पद पर बिठाना चाहती हैं। जिससे इस बार भी वसुंधरा राजे मनमाने तरीके टिकट का वितरण कर सके। इस बात को दिल्ली भी समझ रहा है, यही कारण है कि दिल्ली शेखावत के नाम से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह राजस्थान पर बन रही पकड़ को किसी भी कीमत पर ढीली नहीं होने देना चाहते। कर्नाटक चुनाव में सत्ता से दूर रही भाजपा के बाद माना जा रहा था कि प्रदेशाध्यक्ष के मामले में अब अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश की बात को तवज्जो देते हुए निर्णय करेंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ, चुनाव के बाद भी दिल्ली अपनी बात पर अड़ा हुआ है।