पान पराग का सैम्पल अजमेर की लेब में फेल , पर मैसूर की लेब से सैम्पल के पास होने की उम्मीद

पान पराग का सैम्पल अजमेर की लेब में फेल , पर मैसूर की लेब से सैम्पल के पास होने की उम्मीद
Published Date:
Sunday, June 17, 2018 - 23:54

एस.पी.मित्तल

अजमेर कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की खाद्य प्रयोगशाला में देश के सुप्रसिद्ध पान पराग का सैम्पल फेल हो गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. केके सोनी ने बताया कि पान पराग उत्पाद के अजमेर के अधिकृत वितरक रमेश चंद चंदीराम के पड़ाव स्थित प्रतिष्ठान से स्वास्थ्य अधिकारी राजेश त्रिपाठी और प्रेमचंद शर्मा की टीम ने हाल में सैम्पल लिया। कत्था, चूना, सुपारी सुगंध आदि से बना पान पराग का सैम्पल प्रयोगशाला के मापदंडों पर खरा नहीं उतरा। उत्पाद को लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए प्रतिष्ठान में रखे माल को सीज कर दिया। साथ ही वितरक को हिदायत दी कि इस बैच के माल की बिक्री नहीं करें। डाॅ. सोनी ने बताया कि जिला स्तर की लेब में सैम्पल फेल होने पर उत्पाद मालिक और वितरक को यह अधिकार है कि वह अपने खर्चे पर सैम्पल की जांच मैसूर, पुणे और गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय प्रयोगशाला से करवा सकता है। वितरक ने अपने इस अधिकार का इस्तेमाल किया है। अब मैसूर की प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने पर ही कार्यवाही होगी।

मैसूर की लेब पास होने की उम्मीदः

स्वास्थ्य विभाग के अनुभवी अधिकारियों का कहना है कि पान पराग सैम्पल मैसूर की लेब से पास हो जाएगा और अजमेर में की गई कार्यवाही धरी रह जाएगी। अजमेर ही नहीं बल्कि देशभर से जो फेल सैम्पल राष्ट्रीय लेब में भेजे जाते हैं उनमें से अधिकांश पास ही होते हैं। जब गली कूचों में चलने वाली दुकानों के मालिकों के सैम्पल राष्ट्रीय लेब से पास हो जाते हैं तब पान पराग जैसे संस्थान के सैम्पल कैसे फेल हो सकते हैं?

हम उत्पादन नहीं करतेः

रमेश चंदीराम पान पराग के स्थानीय वितरक रमेश चंदीराम का कहना है कि हम पान पराग का उत्पादन नहीं करते हैं और न ही निर्माण में हमारी भूमिका है। पैकिंग वाले उत्पाद को हम ज्यों का त्यों बेचते हैं। वैसे भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही के बाद हमारी फर्म ने पान पराग की बिक्री बंद कर दी है। हमने स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही से पान पराग के मालिकों को अवगत करा दिया है।

इस जहर को खाते क्यों हैं?

पान पराग खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही अपनी जगह है, लेकिन सवाल उठता है कि आम लोग ऐसे हानिकारक वस्तु को खाते ही क्यों हैं? पान पराग के पाउच पर भी साफ-साफ लिखा है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यदि इस वैधानिक चेतावनी के बाद भी लोग खाते हैं तो फिर अपनी मौत के लिए स्वयं जिम्मेदार है। समय समय पर विशेषज्ञ भी बताते हैं कि पान पराग जैसी वस्तु फंकाने से कैंसर तक हो जाता है। लेकिन इसके बाद भी लोग मानते नहीं है। जहां तक सरकार का सवाल है तो टैक्स वसूली के लालच में जहर बेचने की स्वीकृति देती है। पर सरकार को यह भी पता है कि तम्बाकू और कत्था, चूना, सुपारी से बने गुटखे जहर हैं तो फिर बेचने क्यों देती है।