प्रदेश अध्यक्ष के इंतज़ार में ... वसुंधरा राजे भगवान के दरबार में

प्रदेश अध्यक्ष के इंतज़ार में ... वसुंधरा राजे भगवान के दरबार में
Published Date:
Thursday, May 31, 2018 - 16:05

( एस.पी.मित्तल , वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रसिद्द ब्लॉगर ) .

31 मई का दिन भी गुजर गया और राजस्थान के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं हो सकी। गत 16 अप्रैल को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चहेते अशोक परनामी ने प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था और तभी से प्रदेश अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा हुआ है। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व केन्द्रीय कृषि मंत्री और जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता है, लेकिन सीएम राजे ने वीटो पावर लगाकर शेखावत की घोषणा को रोक रखा है। शेखावत की एवज में प्रदेश नेतृत्व की ओर से केबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी, श्रीचंद कृपलानी और पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे के नाम सुझाए गए थे, लेकिन इन सभी नामों को केन्द्रीय नेतृत्व ने खारिज कर दिया।

26 अप्रैल को इस मुद्दे को लेकर वसुंधरा राजे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह के बीच दिल्ली में तीन घंटे तक वार्ता हुई थी, तब यह तय हुआ कि कर्नाटक के चुनाव के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। कर्नाटक चुनाव भी सम्पन्न हो गए और अमितशाह भी दिल्ली में लगातार निवास कर रहे हैं। यानि अब ऐसा कोई बड़ा काम नहीं है जिसकी वजह से प्रदेश अध्यक्ष के मामले को टाला जा सके। लेकिन फिर भी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो रही है इससे प्रतीत होता है कि वसुंधरा राजे से भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व खुश नहीं है। यदि खुश होता तो अब तक प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाती। केन्द्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व भी इस बात को अच्छी तरह समझता है कि घोषणा में विलम्ब होने से राजस्थान में भाजपा को नुकसान पहुंच रहा है। राजस्थान में नवम्बर में ही विधानसभा के चुनाव होने हैं ऐसे में पिछले डेढ़ माह से प्रदेश अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष के पद को अब सीएम राजे ने भी अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। यही वजह है कि हटाए गए अशोक परनामी को मंत्री समूहों की बैठक में उपस्थित रखा जा रहा है। इतना ही नहीं कई बार सरकारी दौरों पर भी परनामी सीएम राजे के साथ होते हैं। असल में सीएम राजे नहीं चाहती थीं कि परनामी को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया जाए।

मंदिरों में धोक,सीएमओ सूना

जब से प्रदेश अध्यक्ष का विवाद हुआ है तब से जयपुर स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय सूना पड़ा हुआ है। सीएम राजे सारे सरकारी काज सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री आवास से ही कर रही है। वैसे तो 16 अप्रैल के बाद से सीएम बहुत कम समय जयपुर में रही है। कभी भरतपुर तो कभी बांसवाड़ा के दौरे पर रहती हैं। 30 मई को सीएम तीन दिवसीय बांसवाड़ा के दौरे पर थीं। मुख्यमंत्री के मार्ग में जो भी मंदिर आते हैं उन सब में वसुंधरा राजे श्रद्धा भाव से धोक लगाती है। 30 मई को भी बांसवाड़ा के अरथूना हनुमान मंदिर में राजे ने पूजा अर्चना की। परंपरा के अनुसार मंदिर के आसपास के साधु संतों को मुख्यमंत्री की ओर से उपहार भी दिए गए। मुख्यमंत्री जब भी किसी मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाती है, तब प्रशासन साधु संतों का भी इंतजाम करता है। सीएम अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुरूप सभी साधु संतों को चरण स्पर्श करती हैं और उन्हें धोती कपड़ा नरियल आदि दिया जाता है।