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राफेल डील: पीएम के बचाव में उतरे शरद पवार, पार्टी के नेता ही हो गए बागी 

राफेल डील: पीएम के बचाव में उतरे शरद पवार, पार्टी के नेता ही हो गए बागी 
Friday, September 28, 2018 - 18:29
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कटिहार। एक और जहां राफेल का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है, वही दूसरी और राकांपा के अध्यक्ष शरद पंवार में इस दिल में पीएम के पक्ष में बयान देकर अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मार दी है। आपको बता दे की शरद पंवार के कहा था की राफेल डील में लोगो की प्रधानमंत्री की मंशा पर किसी भी प्रकार का कोई शक नहीं है। आपको बता दे की पंवार के इस बयान से उनकी पार्टी के महासचिव तारिक अनवर ने पार्टी की सदस्य्ता के साथ लोकसभा से भी इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि उनके इस्तीफा देने के बाद अभी तक शरद की कोई प्रतिकिर्या नहीं आई है। लेकिन शरद का यह बयान खुद के पैरो पर कुल्हाड़ी मारने जैसा साबित हुआ है।     

इस्तीफा देने के बाद तारिक अनवर ने पत्रकारों से हुई बात-चित के दौरान राफेल पर बोलते हुए कहा, 'राफेल विमानों के सौदे में पीएम मोदी पूरी तरह संलिप्त हैं। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने इस मामले को लेकर जो बयान दिया है, उससे राफेल डील में धांधली की पुष्टि हुई है। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार का व्यक्तिगत तौर पर मैं सम्मान करता हूं लेकिन उन्होंने इस मामले में जिस तरह पीएम मोदी का बचाव किया है, उससे मैं पूरी तरह असहमत और आहत हूं। मैंने पार्टी और लोकसभी की सदस्यता से इस्तीफा दिया है।'

एेेसे में पार्टी अध्यक्ष पवार का बयान नरेंद्र मोदी के बचाव में है जिससे मैं पूरी तरह से असहमत हूं और मैं पार्टी तथा लोकसभा सीट से अपना इस्तीफा दे रहा हूं। अनवर ने कहा कि पवार का मैं व्यक्तिगत रूप से सम्मान करता हूं लेकिन इस मुद्दे पर उनके बयान को दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बयान से मैं आहत हूं और मैंने ये कदम उठाया है। अनवर जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप देंगे। मालूम हो कि विपक्ष राफेल डील पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रह रहा है। जबकि शरद पवार इसमें कोई गड़बड़ी नहीं देख रहे हैं। पवार ने कहा कि इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी की मंशा पर शक नहीं किया जा सकता है। 

अनवर ने कहा, 'जब राफेल मामले में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरा विपक्ष आवाज उठा रहा है, तब हमारे अध्यक्ष पवार ने अप्रत्यक्ष तौर पर पीएम को क्लीन चिट दे दी, जो गलत है। इस मामले पर विपक्ष लगातार जेपीसी से जांच कराने की मांग कर रहा है और शरद पीएम का बचाव करने वाला बयान दे रहे हैं। ये मुझे अस्वीकार है। मैं अभी कटिहार में हूं और दिल्ली पहुंचने के बाद अपने अगले कदम के बारे में फैसला करूंगा।'

तारिक की घोषणा के साथ ही उनके फिर से कांग्रेेस में शामिल होने की संभावना जाहिर की जा रही है। कांग्रेस से उनका पुराना रिश्ता रहा है। अनवर ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत थाना कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की हैसियत से की थी। पहली बार 1972 में पीरबहोर थाना कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। 1977 में कांग्रेस ने उन्हें कटिहार लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। वह पहला चुनाव हार गए। 1980 में कटिहार से उनकी जीत हुई। पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष बनाया। वे युवा कांग्रेस के प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के पद पर रहे। अनवर तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। 

2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अनवर के इस्तीफे और शरद पवार के बयान से विपक्षी एकता को बड़ा झटका लगा है। तारिक अनवर बिहार की कटिहार सीट से एनसीपी के सांसद हैं और यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। एनसीपी के संस्थापक सदस्यों में शामिल तारिक अनवर की गिनती पार्टी के दिग्गज नेताओं में थी। तारिक अनवर, शरद पवार और पीए संगमा ने ही एनसीपी की स्थापना की थी। इससे पहले तारिक अनवर कांग्रेस में थे। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के बयान से असहमत होकर इस्तीफा दिया है।

कांग्रेस में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उनके विदेशी मूल के मुद्दे पर विवाद हुआ था। शरद पवार के साथ पीए संगमा और तारिक अनवर कांग्रेस से अलग हो गए। एनसीपी का गठन हुआ तो अनवर को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। एनसीपी ने उन्हें पहली बार 2004 और दूसरी बार 2010 में राज्यसभा भेजा। यूपीए 2 की सरकार में अनवर को 2012 में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया। कटिहार से तीसरी बार एनसीपी के टिकट पर उनकी जीत हुई। उस समय उन्हें कांग्रेस और राजद का भी समर्थन मिला हुआ था।

तारिक की घोषणा के साथ ही उनके फिर से कांग्रेेस में शामिल होने की संभावना जाहिर की जा रही है। कांग्रेस से उनका पुराना रिश्ता रहा है। अनवर ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत थाना कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की हैसियत से की थी। पहली बार 1972 में पीरबहोर थाना कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। 1977 में कांग्रेस ने उन्हें कटिहार लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। वह पहला चुनाव हार गए। 1980 में कटिहार से उनकी जीत हुई। पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष बनाया। वे युवा कांग्रेस के प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के पद पर रहे। अनवर तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। 

2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अनवर के इस्तीफे और शरद पवार के बयान से विपक्षी एकता को बड़ा झटका लगा है। तारिक अनवर बिहार की कटिहार सीट से एनसीपी के सांसद हैं और यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। एनसीपी के संस्थापक सदस्यों में शामिल तारिक अनवर की गिनती पार्टी के दिग्गज नेताओं में थी। तारिक अनवर, शरद पवार और पीए संगमा ने ही एनसीपी की स्थापना की थी। इससे पहले तारिक अनवर कांग्रेस में थे। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के बयान से असहमत होकर इस्तीफा दिया है।

कांग्रेस में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उनके विदेशी मूल के मुद्दे पर विवाद हुआ था। शरद पवार के साथ पीए संगमा और तारिक अनवर कांग्रेस से अलग हो गए। एनसीपी का गठन हुआ तो अनवर को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। एनसीपी ने उन्हें पहली बार 2004 और दूसरी बार 2010 में राज्यसभा भेजा। यूपीए 2 की सरकार में अनवर को 2012 में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया। कटिहार से तीसरी बार एनसीपी के टिकट पर उनकी जीत हुई। उस समय उन्हें कांग्रेस और राजद का भी समर्थन मिला हुआ था।

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