" पहले जिंदगी..... फिर स्वछता " वजह जानकर सिर पकड़ लोगे , इस गांव में एक भी टॉयलेट नहीं है,

" पहले जिंदगी..... फिर स्वछता " वजह जानकर सिर पकड़ लोगे , इस गांव में एक भी टॉयलेट नहीं है,
Published Date:
Friday, June 1, 2018 - 19:50

घर में शौचालय न बनवाओ नहीं तो बुरा वक्त आ जाएगा, किस्मत फूट जाएगी. इसी चक्कर में बिहार के नवादा जिले के गाजीपुर गांव में टॉयलेट नहीं बन रहे. इस गांव में एक भी टॉयलेट नहीं है, वजह जानकर सिर पकड़ लोगे. हिंदुस्तान टाइम्स में एक खबर छपी है. जिसमें लिखा है कि प्रियंका देवी को पहला बच्चा होने वाला है. डॉक्टर से लेकर घरवालों तक दून्द किए हैं कि खूब खाओ. नहीं तो वजन कम हो जाएगा. जच्चा बच्चा को नुकसान होगा. लेकिन वो दिन में खाना नहीं खाती. नहीं तो रात में उठकर दूर खेतों में जाना पड़ता है. घर में निपटने की व्यवस्था है नहीं.इस गांव में एक भी टॉयलेट नहीं है, वजह जानकर सिर पकड़ लोगे

33 साल पुराना डर आज भी सत्ता रहा है

ये गड़बड़झाला आज से नहीं आदि से चल रहा है. 1984 में एक जने सिद्धेश्वर सिंह अपने घर में शौचालय बनवा रहे थे. उनका बेटा अचानक बीमार हो गया. पता नहीं कौन सी बीमारी ने जकड लिया कि थोड़े ही दिन में मर गया. गांव में कनफुस्की शुरू हो गई कि इसी शौचालय की वजह से बच्चा मरा है.

1996 में राम प्रवेश शर्मा का बच्चा इसी तरह मर गया. जब वो घर में शौचालय बनवा रहे थे. उस जमाने में स्वच्छ भारत मिशन नहीं था लेकिन इन लोगों का मन था. इस अंधविश्वास ने इनके मन और मिशन की वाट लगा दी.

वो दिन है और आज का दिन है, उस गांव में कानी चिरैया भी शौचालय बनवाने का नाम नहीं लेती. सरकार चाहे जित्ता लोन दे दे, चाहे जित्ती धमकी दे दे. लोगों के कान में जूं नहीं रेंगती है. कहते हैं “जिंदगी पहले है. जिंदा रहेंगे तो लैटरीन में हगने जाएंगे न.” 2009 में कुमार अरविंद नाम के एक लड़के ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए गांव वालों को राजी किया लेकिन उसी दौरान उसका एक्सीडेंट हो गया. कूल्हा टूट गया, एक टांग टूट गई. 2015 में इसी तरह एक हादसा पेश आया. एक प्राइमरी स्कूल में शौचालय यूज करने के बाद एक मौत हो गई. उस दिन के बाद उसके अंदर कोई नहीं गया. अब हाल ये है कि उस गांव के घरों में सब सुविधा का सामान मिल जाएगा. टीवी , फ्रिज , कूलर , इन्वर्टर , यानी सब कुछ. लेकिन शौचालय नहीं मिलेगी.

और जिला कलेक्टर ने ने कमर कस रखी है

नवादा के डीएम मनोज कुमार ने चुनौती को स्वीकार कर लिया है. कहा है कि खुद उस गांव में जाकर लोगों को मनाएंगे. अगर सरकारी टॉयलेट बनवाने पड़े तो एक बार में 20-25 बनवा देंगे. उम्मीद है कि लोग उनकी बात मानेंगे. एक बात साफ है, शौचालय बनवाने से अकाल, बाढ़ और भुखमरी नहीं आती. ऐसी मौतें इत्तेफाक की बात हैं,