अनुपम खेर ने डायरेक्टर को धोखेबाज़, झूठा बोलकर अपने करियर की बेस्ट फिल्म हासिल की?

अनुपम खेर ने डायरेक्टर को धोखेबाज़, झूठा बोलकर अपने करियर की बेस्ट फिल्म हासिल की?
Published Date:
Sunday, May 27, 2018 - 07:30

उपासना

भले ही आज अनुपम खेर की बड़ी पहचान ‘सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक’ जैसी ऑस्कर विनिंग फिल्म को मान लिया जाता है या अ वेडनसडे और स्पेशल छब्बीस जैसी हिंदी थ्रिलर्स को, लेकिन जब भी उनके करियर को उठाकर देखा जाएगा तो सिर्फ एक फिल्म है जो सबसे ऊपर बैठी होगी. वो फिल्म है सारांश. 1984 में आई इस फिल्म को लेकर आज भी अचरज किया जाता है कि भला एक 28 साल का लड़का किसी बूढ़े-लाचार आदमी की भूमिका इतने सच्चे ढंग से कैसे निभा सकता है? इस फिल्म की रिलीज को इस हफ्ते 34 साल पूरे हो गए हैं. इस मौके पर जानते हैं फिल्म की कुछ बातें जो दर्शकों को कम ही पता होंगी.

#1. क्या हुआ जब शूटिंग से कुछ दिन पहले अनुपम खेर का रोल किसी और को दे दिया गया?

बात है 1983 की. संभवतः जून की. जब 28 साल के अनुपम खेर को महेश भट्ट ने अपनी आने वाली फिल्म ‘सारांश’ के लिए साइन कर लिया था. इस फिल्म को राजश्री प्रोडक्शंस के मालिक ताराचंद बड़जात्या प्रोड्यूस कर रहे थे. 1 जनवरी 1984 को फिल्म की शूटिंग शुरू होनी थी. लेकिन शूट से दस दिन पहले, 20 दिसंबर को अनुपम खेर को अपने दोस्त सुहास भालेकर का फोन आया. सुहास ने उनको कहा कि वो अब ‘सारांश’ फिल्म के हीरो नहीं हैं. उनका रोल एक्टर संजीव कुमार को दे दिया गया है. ये सुनकर अनुपम को विश्वास नहीं हुआ. उन्होंने डायरेक्टर महेश भट्ट को फोन लगा दिया.

पूछा तो महेश भट्ट ने उनको कहा, “हां! राजश्री वालों को इस रोल के लिए कोई जाना-माना एक्टर चाहिए, न्यू कमर नहीं! लेकिन तू निराश मत हो, फिल्म में किसी और बूढ़े आदमी का रोल तू ले लेना.”

उनके ऐसा कहने के बाद अनुपम खेर ने सोच लिया कि अब बंबई में रहना ही नहीं है. यहां कोई इंसान वादा निभाता ही नहीं है.

वे बहुत गुस्सा थे. और परेशानी में रोते-रोते अपना सारा सामान पैक किया और रेलवे स्टेशन चले गए. वहां जाकर सोचने लगे कि अब जाएं तो कहां जाएं?

इस दौरान उन्हें अपने दादा जी की एक बात याद आ गई कि – “अगर आप किसी के बराबर होना चाहते हो तो उनसे कोई अपेक्षा मत करो.” ये बात दिमाग में आते ही खेर ने सोचा कि अब जा ही रहा हूं तो महेश भट्ट को बता कर जाऊं कि मैं उनके बारे में क्या सोचता हूं? अनुपम ने टैक्सी ली और महेश भट्ट के घर जा पहुंचे.

भट्ट साहब बिल्डिंग के छठे माले पर रहते थे. उस दिन लिफ्ट चल नहीं रही थी. लेकिन कहते हैं न, जब गुस्सा आता तो इंसान में ज्यादा ताकत आ जाती है. उस दिन अनुपम खेर की टांगें लिफ्ट से भी तेज़ भाग रही थीं.

वे सीढ़ियों चढ़ते हुए भट्ट साहब के फ्लोर पर पहुंचे और घंटी बजाई. महेश भट्ट ने दरवाजा खोला. अनुपम को देखते ही बोले, “वेरी गुड माय बॉय, ये हुई न बात. फिल्म (सारांश) में तुम दूसरे बुजुर्ग का रोल करो. देखो कितनी अच्छी बात है कि तुमको संजीव कुमार जैसे बड़े एक्टर के साथ काम करने का मौका मिल रहा है.”

लेकिन अनुपम खेर ने उनकी बात काटते हुए कहा, “भट्ट साहब एक मिनट!” और वे उनको उनके घर की खिड़की के पास ले गए और नीचे सड़क किनारे खड़ी अपनी टैक्सी दिखाते हुए बोले, “वो टैक्सी देख रहे हो आप? उसमें मेरा सामान है. मैं बंबई छोड़कर जा रहा हूं.” इस पर महेश भट्ट चौंके. उन्होंने पूछा – “कहां?”

अनुपम गुस्से में तो पहले ही थे, उसके बाद और चिढ़कर बोले, “आपको क्या लेना-देना. आप तो ये सुनो कि जाने से पहले मैं आपको क्या बताने आया हूं? वो ये कि आप एक नंबर के फ्रॉड हैं. झूठे हैं. धोखेबाज़ हैं. पिछले छह महीने से मैं अपने रोल की प्रैक्टिस करने में लगा हुआ हूं और आज आप कोई और बयान दे रहे हैं? आपकी फिल्म ‘सारांश’ की थीम सच्चाई है न? लेकिन आपके खुद के अंदर ही सच्चाई नहीं है. तो आप क्या ये फिल्म सच्चाई पर बनाएंगे? संजीव कुमार भले ही बहुत अच्छे एक्टर होंगे लेकिन ये रोल मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता. मैं ब्राह्मण हूं और आपको श्राप देता हूं!”

सब बोल-सुनकर अनुपम खेर चले गए. वे सीढ़ियां उतरकर टैक्सी में बैठने लगे तो महेश भट्ट ने ज़ोर से आवाज़ लगाई – “तुम एक मिनट ऊपर आओ!”

उन्होंने खेर के सामने राजश्री प्रोडक्शंस के मालिक को फ़ोन लगाया और कहा कि “जो रियल लाइफ सीन मैंने अभी अनुपम का देखा है, उसे देखकर तो मैं श्योर हूं कि ये फिल्म मैं अनुपम खेर के साथ ही बनाऊंगा. अगर आपको ये फिल्म प्रोड्यूस करने में आपत्ति है तो मैं एनएफडीसी के साथ ये फिल्म बनाऊंगा.” लेकिन बड़जात्या को अनुपम की इस कास्टिंग से कोई आपत्ति नहीं थी. इस तरह फिल्म के लीड एक्टर अनुपम बने. और हां, उस दिन उनकी टैक्सी का भाड़ा महेश भट्ट ने ही दिया.

#2. ‘सारांश’ से पहले महेश भट्ट ने ‘अर्थ’ (1982) डायरेक्ट की थी जो बड़ी हिट रही है. परेशान निजी ज़िंदगी और अस्थापित करियर से जूझ रहे भट्ट के लिए ‘अर्थ’ सबसे बड़ी पहचान बन गई. लेकिन जब ‘सारांश’ आई तो उसने उनको और भी ज्यादा प्रसिद्धि दिलाई. अब भट्ट के करियर में सबसे पहले जिस फिल्म का नाम आता है वो है ‘सारांश.’

#3. फिल्म में अनुपम खेर ने ऐसे बुजुर्ग का रोल किया जो बंबई में रहता है और जिसके जवान बेटे को न्यू यॉर्क में मार दिया जाता है. अब उसकी अस्थियों के पाने के लिए उसे सरकारी दफ्तरों में एड़िया रगड़नी पड़ती हैं और उससे रिश्वत मांगी जाती है, वो गुंडागर्दी झेलता है. जितना उम्दा अभिनय यहां अनुपम का था, उतना ही उनकी पत्नी का रोल निभाने वाली रोहिणी हट्टंगड़ी ने भी. रोहिणी की ये महेश भट्ट के साथ दूसरी फिल्म थी. पहले उन्होंने भट्ट की ‘अर्थ’ में काम किया था जिसके लिए उनको बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

#4. ‘सारांश’ में जो घर आप देखते हैं, वैसा ही दिखने वाला एक घर मुंबई के शिवाजी पार्क में है. उसे देखकर ही बांद्रा के महबूब स्टूडियोज़ में सेम-टू-सेम घर का सेट तैयार किया गया था. बस अलग से उसमें एक कमरा जोड़ा गया था. वो कमरा जो फिल्म में रोहिणी और अनुपम का बेडरूम दिखाया गया है.

#5. महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘सारांश’ की कहानी दो घटनाओं से प्रेरित है. पहली घटना थी उनके अाध्यात्मिक गुरु यू .जी. कृष्णमूर्ति की आंखों के सामने उनके जवान बेटे की कैंसर से हुई मौत. दूसरी घटना थी, उनके परिचित एक महाराष्ट्रियन दम्पति के एकलौते बेटे की जिसका न्यू यॉर्क में मर्डर हो गया था. इन दोनों घटनाओं को मिलाकर महेश ने ‘सारांश’ की कहानी लिखी.

#6. साल 1984 में इस फिल्म को 57वें ऑस्कर अवॉर्ड्स में इंडिया की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर भेजा गया था. हालांकि फाइनल दौड़ का वो हिस्सा नहीं बन पाई.

#7. इस फिल्म को करीब 1 करोड़ के बजट में बनाया गया था और इसने 2 करोड़ का बिजनेस किया.

#8. माना जाता है कि डायरेक्टर शैंकी श्रीवासन की 2016 में आई फिल्म ‘द लास्ट स्माइल’ महेश भट्ट की ‘सारांश’ की ही इंग्लिश रीमेक थी. इसमें अनुपम खेर का रोल कीथ स्टीवेंसन (अकेला, 1991) ने निभाया था. ( लल्लनटॉप.कॉम )