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गुरु का हुआ राशि परिवर्तन इन राशियों पर होगा असर

गुरु का हुआ राशि परिवर्तन इन राशियों पर होगा असर
Friday, October 12, 2018 - 12:30
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गुरु गोचर वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि गुरु जीवन में उन्नति का कारक होता है और वैदिक ज्योतिष में गुरु को अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। बृहस्पति को देव गुरु कहा जाता है और यह ज्ञान, कर्म, धन, पुत्र और विवाह का कारक होता है। बृहस्पति के प्रभाव से जातक का मन धर्म एवं आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगता है। इसके अलावा जातक को करियर में उन्नति, स्वास्थ्य लाभ, मजबूत आर्थिक स्थिति, विवाह एवं संतानोत्पत्ति जैसे शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि कुंडली में बृहस्पति बलवान है तो अन्य ग्रहों की स्थिति ठीक नहीं होने पर भी कोई कष्ट या हानि नहीं होती है। बृहस्पति के बलवान होने पर उक्त जातक का परिवार, समाज और हर क्षेत्र में प्रभाव रहता है। अब बात करते हैं गुरु गोचर 2018 की।

वर्ष 2018 में बृहस्पति देव ज्यादातर समय तुला राशि में गोचर करेंगे। 11 अक्टूबर, गुरुवार को रात्रि 8:39 बजे तुला राशि से चलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे और 30 मार्च 2019, शनिवार रात्रि 3:11 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। आइये जानते हैं गुरु के गोचर का सभी राशियों पर क्या असर होगा?

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मेष

बृहस्पति देव आपके नवम और द्वादश भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से 8 वे भाव में गोचर करेंगे। गुरु का अष्टम भाव में स्थित रहना शुभ संकेत नहीं दे रहा है। इसके परिणामस्वरूप इस अवधि में आपको भाग्य का साथ नहीं मिलेगा। दुर्भाग्य की वजह से असफलताएं मिल सकती हैं लेकिन गुरु की वंदना करते हुए अपने प्रयास जारी रखें, देर से ही लेकिन सफलता अवश्य मिलेगी। गुरु गोचर की इस अवधि में धन हानि भी हो सकती है। ऐसे में व्यापार-व्यवसाय और निवेश संबंधी मामलों में आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है इसलिए धन से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतें। इसके अतिरिक्त धन के मामले में किसी पर भी आंख मूंदकर विश्वास नहीं करें। यदि निवेश की योजना बना रहे हैं तो अच्छी तरह से अध्ययन करके आगे बढ़ें। इस अवधि में आपको कई अनचाही यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। इन यात्राओं की वजह से आपको शारीरिक थकान हो सकती है। इस दौरान बुरा आचरण करने से बचें।

उपाय: बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

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वृषभ

देवगुरु बृहस्पति आपके अष्टम व एकादश भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से 7 वे भाव में गोचर करेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सप्तम भाव जीवन साथी और वैवाहिक जीवन का भाव होता है। अत: गुरु के सप्तम भाव में स्थित होने से आपको जीवनसाथी की ओर से खुशियां मिलेंगी और आपका दाम्पत्य जीवन मधुर रहेगा। हालांकि कुछ समय ऐसा भी आएगा जब आपको खट्टे-मीठे अनुभवों का सामना करना पड़े। इसलिए ऐसी स्थिति में संयम के साथ काम लें और जीवनसाथी की भावनाओं की कद्र करें। यदि पार्टनरशिप में बिजनेस करने के बारे में सोच रहे हैं तो यह समय इसके लिए अनुकूल है। क्योंकि व्यावसायिक साझेदारी से लाभ होने की संभावना है। बिजनेस पार्टनर या जीवनसाथी की मदद से भी लाभ मिल सकता है। इस अवधि में नौकरी, व्यवसाय और पैसों से जुड़े मामलों में फैसले सोच-समझकर लें। क्योंकि बुद्धिमानी से लिए गए फैसलों से आपको बहुत फायदा होगा।

उपाय: गुरुवार को हल्दी व चना दाल दान में दें और रोजाना गाय को रोटी खिलायें।

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मिथुन

धर्म और ज्ञान के कारक कहे जाने वाले बृहस्पति देव आपके सप्तम व दशम भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से 6 वे  भाव में संचरण करेंगे। गुरु का षष्ठम भाव में स्थित होना आपके लिए एक अच्छा संकेत नहीं है। क्योंकि इस अवधि में शत्रु और विरोधी आपको परेशान करेंगे इसलिए इन लोगों से सतर्क रहें। इस दौरान किसी बात को लेकर भाई-बहनों के साथ भी मतभेद हो सकते हैं अत: ऐसी परिस्थितियों में संयम के साथ काम लें और हर मामले को आपसी बातचीत से सुलझाने की कोशिश करें। षष्ठम भाव में गुरु का स्थित होना किसी बीमारी का संकेत भी कर रहा है इसलिए सेहत को लेकर बिल्कुल लापरवाही नहीं बरतें। गुरु गोचर की इस अवधि में सफलता पाने के लिए आपको संघर्ष करना पड़ सकता है। अब बात करें अगर आपकी प्रोफेशनल लाइफ की तो, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन और बिजनेस पार्टनरशिप में विवाद होने की संभावना है। इस अवधि में खर्च बढ़ने से परेशानी हो सकती है इसलिए बेवजह के खर्चों से बचें।

उपाय: ब्राह्मण को शक्कर दान करें और गाय को रोटी खिलाएं।

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कर्क

बृहस्पति देव आपके षष्ठम व नवम भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से 5 वे  भाव में गोचर करेंगे। देवगुरु बृहस्पति का पंचम भाव में स्थित होना आपके लिए शुभ संकेत दे रहा है। इसके परिणामस्वरुप आपके घर में नन्हा मेहमान आ सकता है यानि इस अवधि में आपको संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है या फिर आपके परिवार में किसी बच्चे का जन्म हो सकता है। बच्चे का जन्म होने से परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। सरकारी विभाग या प्राधिकरण से लाभ मिलने की संभावना बन रही है। ऐसे में सरकारी महकमे के उच्च अधिकारी आपका पक्ष ले सकते हैं। गुरु गोचर की इस अवधि में आपको अच्छे लोगों की संगत मिलेगी। इस दौरान समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों के साथ आपका मेल-जोल बढ़ेगा और उनके संपर्क में आने से नई बातें व विचारों को जानने का अवसर मिलेगा।

उपाय: बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

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सिंह

बृहस्पति देव आपके पंचम व अष्टम भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से 4 वे  भाव में  गोचर करेंगे। गुरु का चतुर्थ भाव में स्थित होना आपके लिए थोड़ा कष्टकारी हो सकता है। इस अवधि में मित्र और रिश्तेदारों के साथ मतभेद हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं कि आपको अपमानित होना पड़े। इसलिए बेहतर होगा कि रिश्तेदारों और मित्रों के साथ संतुलित व्यवहार रखें। गुरु गोचर की इस अवधि में तनाव और परेशानियों के बीच खुशियां भी आएंगी। घर में कोई शुभ कार्य संपन्न हो सकता है। आप परिजनों के साथ अच्छा समय व्यतीत करेंगे। इस अवधि में हिंसक पशुओं से थोड़ा बचकर रहें, साथ ही वाहन सावधानी से चलाएं। आपकी माता का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है इसलिए उनका विशेष ध्यान रखें। किसी भी प्रकार स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें। मानसिक तनाव अधिक होने से आपके निजी जीवन में अशांति रह सकती है अत: अधिक तनाव लेने से बचें और प्रसन्न रहने की कोशिश करें। जीवन में आने वाली हर चुनौती का आत्मविश्वास के साथ सामना करें।

उपाय: गुरुवार को केले के पेड़ का पूजन करें।

 

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कन्या

देवगुरु बृहस्पति आपके चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से 3 वे  भाव में गोचर करेंगे। तृतीय भाव में गुरु की यह स्थिति शुभ प्रतीत नहीं हो रही है। इस अवधि में आपको अपने व्यवसाय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए वे जातक जो व्यवसाय करते हैं उनके लिए यह समय संभलकर चलने वाला है। इस दौरान बिजनेस में किसी भी तरह का निवेश करने से पहले एक बार अच्छी तरह से अध्ययन कर लें। क्योंकि यदि सही रणनीति बनाकर काम किया तो आपको इसका लाभ अवश्य मिलेगा। वहीं नौकरी पेशा जातकों के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। प्रदर्शन कमजोर होने या लापरवाही की वजह से आपका प्रमोशन रुक सकता है इसलिए अपने काम पर विशेष ध्यान दें। ऑफिस में बेकार की बातें करने से बचें। बात करें आपके स्वास्थ्य की तो, गुरु गोचर के दौरान आपकी सेहत थोड़ी कमजोर रह सकती है। स्वास्थ्य संबंधी विकार होने से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान मित्रों से भी अलगाव हो सकता है। हालांकि मजबूत इच्छाशक्ति से आप इन तमाम चुनौतियों को मात दे सकते हैं इसलिए मेहनत और लगन के साथ काम करते रहें।

उपाय: अपने घर में नियमित रूप से कपूर का एक दीया जलायें।

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तुला

बृहस्पति देव आपके तृतीय और षष्ठम भाव के स्वामी हैं एवं आपकी राशि से 2 वे  भाव में  गोचर करेंगे। वैदिक ज्योतिष में द्वितीय भाव को धन भाव कहा जाता है इसलिए यह हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है। गुरु का द्वितीय भाव में स्थित होना शुभ संकेत दे रहा है। इस अवधि में आप पैसों का संचय करेंगे और धन लाभ की प्राप्ति होगी। इस दौरान छोटे-बड़े सभी तरह के निवेश कार्यों से लाभ की संभावना बन रही है हालांकि जल्दबाजी में ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़े। गुरु के गोचर के प्रभाव से पारिवारिक जीवन में शांति और सद्भाव बना रहेगा। इस दौरान परिवार में हर्ष का वातावरण रहेगा। वहीं अगर बात करें आपके व्यक्तित्व की तो, गुरु गोचर की इस अवधि में आप अपनी छवि से दूसरों को प्रभावित करेंगे। लोग आपके कार्य और व्यक्तित्व की प्रशंसा करेंगे। गुरु के प्रभाव से आपकी प्रोफेशनल लाइफ भी शानदार रहने वाली है। कार्यस्थल पर आपको अपनी मेहनत और प्रयासों का फल मिलेगा। इसलिए हो सकता है कि आपको प्रमोशन व सैलरी इंक्रीमेंट की सौगात मिल जाये।

उपाय: गुरुवार के दिन शुद्ध घी का दान करें।

वृश्चिक

बृहस्पति देव आपके द्वितीय और पंचम भाव के स्वामी हैं। इस अवधि में गुरु आपकी राशि में ही गोचर करेंगे और 1 भाव में स्थित रहेंगे। गुरु की यह स्थिति आपके लिए कष्टकारी हो सकती है। क्योंकि इस दौरान आपको कई चुनौतियों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि में आप अपना निवास स्थान बदल सकते हैं या फिर काम के सिलसिले में आपको अपने घर से दूर जाना पड़ सकता है। गुरु गोचर के दौरान खर्च अधिक होने से आपका बजट बिगड़ सकता है इसलिए बेवजह के खर्च करने से बचें और धन की बचत करें। चुनौतियों की वजह से मानसिक तनाव बढ़ेगा इसलिए ऐसी स्थिति में घबराए नहीं बल्कि दृढ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। शुरुआती संघर्ष के बाद आप इन चुनौतियों पर विजय पा लेंगे। इस अवधि में पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें, क्योंकि धन हानि होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त शेयर बाजार या जोखिम भरे कार्यों में पूंजी निवेश करने से पहले एक बार अच्छे से अध्ययन कर लें वरना आपको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उपाय: श्री शिव रुद्राभिषेक कराएं।

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धनु

बृहस्पति देव आपकी राशि व चतुर्थ भाव के स्वामी हैं । इस गोचर के दौरान बृहस्पति आपकी राशि से 12  वें भाव में प्रवेश करेगा। वैदिक ज्योतिष में द्वादश भाव को व्यय व हानि का भाव कहते हैं और बृहस्पति का इस भाव में स्थित होना शुभ प्रतीत नहीं हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप मानसिक तनाव बढ़ने से आप परेशान रहेंगे इसलिए बेवजह तनाव लेने से बचें। यदि कोई तनावपूर्ण परिस्थिति बनें तो धैर्य और संयम के साथ काम लें। इस अवधि में प्रॉपर्टी को लेकर भी कोई विवाद हो सकता है अत: जमीन या मकान की खरीदी-बिक्री और मालिकाना हक से जुड़े मामलों में थोड़ा सावधान रहने की जरुरत है। धन हानि होने से आप परेशान हो सकते हैं इसलिए पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें। बिना सोच-विचार के कोई निवेश ना करें वरना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। गुरु गोचर के दौरान परिवार के लोगों से अलगाव या मनमुटाव हो सकता है। ऐसे हालात में परिजनों से बातचीत के जरिये मतभेदों को दूर करने की कोशिश करें।

उपाय: बृहस्पति यंत्र की स्थापना करें और उसकी नियमित पूजा करें।

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मकर

धर्म और दर्शन के कारक कहे जाने वाले बृहस्पति देव आपके द्वादश व तृतीय भाव के स्वामी हैं। इस अवधि में बृहस्पति आपकी राशि से 11  वें भाव में संचरण करेंगे। भारतीय ज्योतिष में एकादश भाव को लाभ का भाव कहा जाता है अत: गुरु का इस भाव में होना शुभ प्रतीत हो रहा है। इस अवधि में गुरु के प्रभाव से प्रोफेशनल लाइफ में आपकी उन्नति होगी। नौकरी पेशा और व्यावसायिक जातकों को बेहतर परिणाम मिलेंगे। इस दौरान कार्यस्थल पर आपको पदोन्नति या सम्मान मिलने की संभावना है। इसके अलावा व्यवसाय कर रहे जातकों को अपने बिजनेस का विस्तार करने में बड़ी सफलता मिलेगी। गुरु गोचर की इस अवधि में वे नया व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। गुरु के गोचर की इस अवधि में घर-परिवार में कोई नया मेहमान आ सकता है यानि आपको संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। आपका रुझान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों की ओर होगा। इस दौरान आप तीर्थ दर्शन पर भी जा सकते हैं। आपका वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहेगा और आपको शयन सुख की प्राप्ति होगी। आप जीवनसाथी के साथ अच्छे और मधुर पल व्यतीत करेंगे।

उपाय: हर गुरुवार को सुबह के समय पीपल के वृक्ष को बिना स्पर्श किये जल चढ़ाएं।

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कुंभ

देवगुरु बृहस्पति आपके एकादश भाव व द्वितीय भाव के स्वामी हैं और बृहस्पति आपकी राशि से 10वें भाव में गोचर करेंगे। ज्योतिष में दशम भाव कर्म का भाव होता है और यह आपकी नौकरी व व्यवसाय से संबंधित होता है। गुरु का दशम भाव में स्थित होना आपके लिए शुभ संकेत नहीं दे रहा है। क्योंकि इस अवधि में कार्य स्थल पर आपके कुछ लोगों के साथ मतभेद हो सकते हैं इसलिए ऑफिस में बेवजह की बातों से बचें और सहकर्मी व अधिकारियों के साथ अच्छा व्यवहार करें। गुरु गोचर की इस अवधि में आपकी सेहत भी प्रभावित हो सकती है अत: स्वास्थ्य को लेकर कोई लापरवाही ना बरतें। वहीं कमजोर सेहत का असर आपके मनोबल पर भी पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप आपकी इच्छा शक्ति में कमी आएगी और मानसिक तनाव आप पर हावी रहेगा। बेहतर यही होगा कि बेवजह तनाव लेने से बचें। वहीं कार्यस्थल पर सफलता पाने के लिए आपको कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। हालांकि देर से ही सही लेकिन आपको सफलता अवश्य मिलेगी इसलिए कड़ी मेहनत और मजबूत आत्मबल के साथ आगे बढ़ते रहें।

उपाय: पेंट या शर्ट की जेब में पीले रंग का रुमाल रखें और मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।

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मीन

देवगुरु बृहस्पति आपकी राशि और दशम भाव के स्वामी हैं। इस गोचरीय अवधि में बृहस्पति आपकी राशि से 9 वें भावमें संचरण करेंगे। गुरु का नवम भाव में स्थित होना आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा। इस अवधि में कार्य क्षेत्र में आपकी तरक्की होगी और नए अवसर मिलेंगे। ऑफिस में प्रमोशन और सैलरी में बढ़ोत्तरी की सौगात मिल सकती है। कुल मिलाकर गुरु की कृपा से आपकी प्रोफेशनल लाइफ में चार-चांद लगने वाले हैं। इस अवधि में कई माध्यमों से आपको लाभ की प्राप्ति होगी और जीवन में खुशहाली आएगी। चूंकि गुरु धर्म और दर्शन का कारक है इसलिए इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। आप तीर्थ दर्शन या किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं। इस दौरान की जाने वाली यात्राएं आपके लिए सुखद और लाभकारी होंगी। गुरु की कृपा से आपकी लोकप्रियता में वृद्धि होगी। वहीं पिता के माध्यम से और उनकी सलाह से आपको लाभ की प्राप्ति होगी इसलिए बेहतर होगा कि पिता जी के विचार और सुझावों के अनुसार कार्य करें और उनकी बातों को नजर अंदाज नहीं करें।

उपाय: पुखराज रत्न को सोने की अंगूठी में जड़वा कर गुरुवार के दिन तर्जनी अंगुली में धारण करें।

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