आयकर सर्वे प्रभावित, बृजपाल चौधरी के बीमार होने से

आयकर सर्वे प्रभावित, बृजपाल चौधरी के बीमार होने से
Published Date:
Sunday, June 10, 2018 - 21:33

नोएडा। आयकर के सर्वे पर बनी फिल्म 'रेड' अवश्य देखी होगी। इसे हाल ही में मल्टीप्लेक्स पर रिलीज किया गया। जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसमें उत्तर प्रदेश के एक बाहुबली सांसद के यहां सबसे लंबी रेड को दिखाया गया था। इसमें विभाग के अधिकारी को रेड के दौरान किस प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है।

ठीक इसी तरह की हरकत नोएडा विकास प्राधिकरण के निलंबित सहायक परियोजना अभियंता (एपीई) बृजपाल चौधरी के यहां भी शुक्रवार को आयकर टीम के साथ हुई। इसमें रिश्तेदार सहित सेक्टर के तमाम लोगों ने देर शाम बृजपाल की तबीयत खराब होने का हवाला देकर घर का घेराव कर दिया।

इसके बाद मौके पर डाक्टर की टीम पहुंची और टीम को अपनी कार्रवाई को बीच में छोड़कर कार्यालय लौटना पड़ा। टीम के अधिकारियों ने अपने आला अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया है। जिसमें पूरी तस्वीर को स्पष्ट किया गया है।

बेटे की शादी पर 2.50 करोड़ रुपये खर्च, हिसाब मांगा

आयकर की टीम को बेटे अंकुर चौधरी की शादी पर 2.50 करोड़ रुपये खर्च होने के दस्तावेज हाथ लगे। इसका पूरा हिसाब किताब मांगा है। इस दौरान यह रकम कहां से आई है, किन-किन मदों में खर्च की गई है। इसकी जानकारी टैक्स रिटर्न में क्यों नहीं दी गई है। ऐसे तमाम सवालों का जवाब भी तलब किया है।

हापुड़ के निजी स्कूल व प्रॉपर्टी पर पॉलिटिकल कनेक्शन

आयकर सर्वे में जब्त दस्तावेजों में बृजपाल का पालिटिकल कनेक्शन भी सामने आ रहा है। इसमें पूर्व सत्ताधारी कुछ कद्दावर नेताओं से करीबी संबंध होने की जानकारी भी मिली है। उनके साथ मिलकर ही बृजपाल की हापुड़ के पिलखुवा में एक निजी स्कूल में हिस्सेदारी भी है। इस हिस्सेदारी को लेकर बृजपाल से गहनता से पूछताछ भी आयकर अधिकारियों ने की है। जिसमें उनके पाटर्नर की हिस्सेदारी की जानकारी हासिल की जा रही है। जिससे यह पता लगाया जा सके कि कितने पैसे के कितने हिस्सेदार हैं। दूसरी ओर गाजियाबाद के मोदीनगर में भी बृजपाल चौधरी की 15 एकड़ जमीन है।

सिडीकेट के जरिए अकूत संपत्ति जुटाने की बात आ रही सामने

आयकर की टीम को सर्वे में ऐसे दस्तावेज मिले जिसमें एक सिडीकेट का पता चला है। यह एक ऐसा समूह है जो राजनीतिक लाभ के लिए बनाया गया। इसमे फर्जी कंपनिया खोली गईं। काली कमाई को सफेद करने के लिए नकद में निवेश किया गया।

यह सब पूर्व सत्ताधारी कुछ कद्दावर नेताओं के कहने पर किया गया। इसमे प्राधिकरण में दिलाए गए ठेके तक शमिल हैं। जिसकी रकम कंपनियों के जरिए मोटा कमीशन के रूप में हासिल की गई है। यह कमीशन का ट्रांजेक्शन भी नकद में किया गया। ताकि आयकर विभाग को इसकी भनक तक न लगे।

''सर्वे बीच में छोड़ना पड़ा है, क्योंकि बृजपाल की तबीयत खराब हो गई थी। जल्द ही उनसे इस मामले पर दोबारा से पूछताछ होगी। काफी बेनामी संपत्ति के दस्तावेज हाथ लगे हैं।''
अमरेंद्र कुमार, प्रिसिपल डायरेक्टर इंवेस्टिगेशन, कानपुर रेंज