कर्नाटक विधानसभा चुनाव : भाजपा और कांग्रेस दोनों केलिए करो या मरो की सियासी जंग है

कर्नाटक विधानसभा चुनाव : भाजपा और कांग्रेस दोनों केलिए करो या मरो की सियासी जंग है
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों केलिए करो या मरो की सियासी जंग है। इसके नतीजे का सीधा प्रभाव दोनों दलों के अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ेगा। कांग्रेस हारी तो वह न सिर्फ अंतिम बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य भी गंवा देगी, बल्कि अगले लोकसभा चुनाव में विपक्ष को खुद के नेतृत्व में एकजुट करने की मुंहिम पर पानी फिर जाएगा। भाजपा अगर दक्षिण का किला भेदने में नाकाम रही तो न सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बढ़ा सियासी कद परेशानी खड़ी करेगा, बल्कि लोकसभा चुनाव से ठीक पूर्व मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की राह भी रपटीली हो जाएगी।

केंद्र की सियासत पर नतीजे का व्यापक प्रभाव पडने के कारण ही यह चुनाव दोनों दलों केलिए जीवन मरन का सवाल बन गया है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो सोशल इंजीनियरिंग के माहिर सीएम सिद्घारमैया ने लिंगायत-शैव को अलग धर्म का दर्जा दे कर भाजपा को उलझा दिया है। पार्टी की रणनीति भाजपा के कोर मतदाता माने जाने वाले लिंगायत (17 फीसदी) और जेडीएस के परंपरागत मतदाता रहे वोक्कालिंगा (11 फीसदी) बिरादरी में सेंध लगाने की है। सिद्घारमैया कन्नड़ भाषा और राज्य का अलग झंडा मामले को तूल दे कर राज्य अस्मिता कार्ड भी खेल रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी ओबीसी (16 फीसदी), कुरुबा (7 फीसदी), मुसलमान (16 फीसदी) को साधे रख कर फिर सी जीत हासिल कर लेगी। सोमवार को जेडीएस के 7 विधायकों ने कांग्रेस का दामन भी थामा है।

उधर लिंगायत को अलग धर्म का दांव से भाजपा भले परेशानी में है, मगर पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इससे हिंदू मतदाता कांग्रेस से नाराज हो सकते हैं। यही कारण है कि एक ओर जहां अमित शाह और लिंगायत बिरादरी के कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा इस बिरादरी से जुड़े मठों का ताबड़तोड़ दौरा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस पर हिंदुओं को बांटने का लगातार आरोप भी लगा रहे हैं। पार्टी की रणनीति कांग्रेस के ओबीसी और जेडीएस के वोक्कालिंगा वोट बैंक में सेंध लगाने की है। जबकि जेडीएस ने बसपा से समझौता कर अपने खाते 5 फीसदी दलित वोट को जोडने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने येदियुरप्पा को अपना चेहरा बनाया है।

लिंगायत क्यों अहम
आबादी 17 फीसदी
120 सीटों पर व्यापक प्रभाव
वर्तमान में 100 विधायक इसी बिरादरी के
इस बिरादरी से अब तक 7 सीएम