करोड़ों की प्रॉपर्टी और पेट्रोल पंप की मालिक हैं निलंबित IAS निर्मला मीणा

करोड़ों की प्रॉपर्टी और पेट्रोल पंप की मालिक हैं निलंबित IAS निर्मला मीणा
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जयपुर: गरीबों को मिलने वाले 35 हजार क्विटल गेंहू घोटाला मामले में राजस्थान की आरोपित निलंबित आईएएस अफसर निर्मला मीणा के पास करोड़ों की संपत्ति मिली है। राजस्थान के जोधपुर में जिला रसद अधिकारी रहते हुए निर्मला मीणा ने विभागीय कर्मचारियों, आटा मिल मालिकों व राशन विक्रेताओं से मिलीभगत कर आठ करोड़ रुपए मूल्य के 35 हजार क्विटल गेंहू की कालाबाजारी की थी।

निर्मला मीणा और उनके सहयोगियों ने गरीबों में वितरित होने वाले गेंहू को फर्जी राशन कार्ड बनाकर आटा मिलों में पहुंचा दिया और बदले में करोड़ों रुपए कमाए। गेंहू घोटाला मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद से फरार चल रहीं निर्मला मीणा के जोधपुर स्थित ठिकानों पर राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने गुरुवार और शुक्रवार दो दिन तक कार्रवाई की।

इस दौरान उनके खुद के नाम से 10 करोड़ रुपए से भी अधिक मूल्य की संपत्ति होने के दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही उनके बेटे और अन्य रिश्तेदारों के नाम से जयपुर, जोधपुर व नोएडा में आवास और दो बैंकों में तीन लाख रुपए की एफडी के भी दस्तावेज मिले हैं।

निर्मला मीणा के नाम से जयपुर में दो, जोधपुर में पांच मकान, एक पेट्रोल पंप, बीस बीघा जमीन और एक दुकान होने के दस्तावेज मिले हैं। घोटाले में मीणा का सहयोग करने के आरोप में उनके तत्कालीन पीए अशोक पालीवाल और आटा मिल मालिक स्वरूप सिंह उपाध्याय के जोधपुर स्थित आवासों पर भी छापेमारी की गई।

यहां भी आय से अधिक संपत्ति व अन्य गेंहू घोटाले से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। एसीबी अधिकारियों ने मीणा, पालीवाल और उपाध्याय के घरों पर जाकर परिजनों से पूछताछ भी की। निर्मला मीणा और अशोक पालीवाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगा रखी है।

हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 15 मार्च को तय की। तब तक इनकी गिरफ्तारी रोकी गई है, लेकिन फिर भी ये फरार चल रहे हैं। इस मामले में राज्य के खाद्य मंत्री बाबूलाल वर्मा का कहना है कि मामले में जो भी आरोपी है, उसके बख्शा नहीं जाएगा। गरीबों के हिस्से का गेंहू उन्हें ही मिलना चाहिए। अफसरों को कालाबाजारी करने का हक नहीं है।