राजस्थान पुलिस ने दस साल पहले मरे व्यक्ति को बना दिया हिंसा का आरोपित

राजस्थान पुलिस ने दस साल पहले मरे व्यक्ति को बना दिया हिंसा का आरोपित
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जयपुर,( JNN ) । भारत बंद के दौरान हुई हिंसा पर अपनी नाकामी पर पर्दा ड़ालने के लिए पुलिस ने उन लोगों को भी आरोपितों की सूची में शामिल कर लिया, जिनकी या तो वर्षों पहले मौत हो चुकी या फिर कोई गंभीर बीमारी के कारण चल फिर भी नहीं सकता। पुलिस अधिकारियों ने थाने में बैठकर ही आरोपितों की सूची बना ली और फिर उनकी गिरफ्तारी शुरू कर दी। इसमें दलित समुदाय के लोग शामिल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई का दलित समाज में काफी विरोध हो रहा है। दलित समाज के लोगों ने इस संबंध में प्रदेश के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा भरतपुर जिले में दर्ज किए गए एक मामले में तेजनगर गांव के तेज सिंह को आरोपित बनाया है, जबकि उसकी 17अप्रैल, 2007 को एक सड़क हादसे में मौत हो चुकी, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ 2 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसी गांव के विजय सिंह को भी आरोपितों की सूची में शामिल किया है, इसकी मौत पिछले वर्ष बीमारी से हो गई थी। भरतपुर जिले के ही रूपवास पंचायत निवासी बिशन जाटव सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित है, वह चारपाई से खड़ा भी नहीं हो सकता, पुलिस ने उसे भी आरोपित बना दिया। इसी तरह सीकर जिले के नीमकाथाना निवासी रोशन मुंडोतिया को भारत बंद में हुई हिंसा का आरोपी माना है, जबकि वह इस दिन जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती अपने रिश्तेदार से मिलने आया था।

उल्लेखनीय है कि 2 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने प्रदेशभर में 250 केस दर्ज कर 1000 से अधिक लोगों को आरोपितों की सूची में शामिल किया है।

इस मामले में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया का कहना है कि मुझसे कुछ लोग मिले हैं, मैंने पुलिस महानिदेशक को पूरे प्रकरण की जांच के लिए कहा है।