वाह रे वाह मोदी सरकार के क्या कहने जुमले और वादों से ही चल रही है सरकार

वाह रे वाह मोदी सरकार के क्या कहने जुमले और वादों से ही चल रही है सरकार
Wednesday, February 28, 2018 - 12:45

वाह रे वाह मोदी सरकार के क्या कहने जुमले और वादों से ही चल रही है सरकार

आज हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ट्वीट के जरिए कह रहे हैं और बता रहे हैं कि विश्वास के साथ विकास हो रहा है लेकिन मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा हूं कि विकास किसका हो रहा है सरकार का या देश का जहां तक देश की बात है तो यह है वर्तमान कि भारत सरकार आम जनता को हर तरीके से लूट रही है चाहे वह रेल में किराए का खेल हो या टैक्स का खेल हो लेकिन फुटबॉल जनता ही बन रही है और विकास सरकार के मंत्रियों का और हमारे देश के 542 लोकसभा सांसद एवं 200 राज्यसभा सांसदों का तथा देश के सभी विधायक और विधान परिषदों के व सदस्यों का हो रहा है और हो भी क्यों कि यह हमारे देश के नीति निर्धारक भविष्य निर्माता और भाग्य विधाता बने हुए बैठे हैं मैं आज मोदी जी से सरकार के माननीय सांसदों एवं सभी राजनीतिक दलों से एक सवाल करना चाहता हूं यह कहां तक उचित है कि आप जुमलों और वादों से सरकार चलाएं और लोगों को बेवकूफ बनाएं इसके दो उदाहरण में आपके सामने पेश करना चाहता हूं

नंबर ( 1 )
हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ट्विटर के जरिए अपने बधाई संदेश स्वयं का गुणगान एवं अपनी सरकार का महिमा मंडन करते रहते हैं और लोकसभा चुनाव के वक्त यह कहा था 1 करोड़ युवाओं को प्रतिवर्ष नौकरी देंगे लेकिन हमारे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री जी को ट्विटर की जरिए बताया कि कैसे उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकारी रेल सेवा के लिए चयनित युवाओं के भविष्य के साथ में खिलवाड़ कर रहे हैं और यह बात मैंने ट्विटर पर एक बार नहीं बार-बार कहीं लेकिन लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया ऐसा है यह है हमारा डिजिटल इंडिया रेलवे के उच्च अधिकारियों की दादागिरी और मनमानी भी देखी कि माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय खंड पीठ जोधपुर के फैसले को हवा में उड़ा दिया और 4 लोगों को पैसे लेकर पूर्व महाप्रबंधक अशोक गुप्ता चुपचाप नियुक्ति दे गए लेकिन हमारे मोदी जी की इमानदारी तो देखी जो कहते थे ना तो खाऊंगा और न ही खाने दूंगा लेकिन यह अभी जुमला बनकर रह गया हमारे मोदी जी हर महीने मन की बात तो करते हैं लेकिन 80 बेरोजगार युवाओं की मन की बात नहीं सुनी और सुने भी क्यों . गौरतलब है की 2014 के चुनाव में चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 21 करोड़ युवाओं ने पहली बार अपने मत का प्रयोग किया और उन युवाओं को एक उम्मीद जगी थी .लेकिन आज हालत ये है की 18 -29 साल तक के लगभग ३० करोड़ युवा बेरोजगार घूम रहे है और प्रधानमंत्री जी उन्हें अब " पकोड़ा व्यवसाय " अपनाने की सलाह दे रहे है

क्योंकि जैसे 15 लाख हर भारतीय के खाते में 100 दिन की अंदर आ जाएंगे जब मांग उठने लगी तो भाजपा के अध्यक्ष ने कहा कि यह तो एक मात्र जुमला मात्र है मैं आज माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी से और सरकार की मंत्रियों से एक सवाल करना चाहता हूं कि किस विश्वास के साथ हो रहा है देश का विकास

नंबर (2 )
हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जो देश की जनता को मेरे प्यारे मित्रों भाइयों बहनों एवं माता और बुजुर्गों कह के संबोधित करते हैं उन्हीं को ही उनकी सरकार के द्वारा रेल टिकिट पर यह लिख कर बताया जाता है कि " आप जानते हैं आपकी यात्रा की रेल किराया 43 प्रतिशत खर्चा देश के आम नागरिक वहन कर रहे हैं " इसका मतलब यह है कि भीख मांगकर यात्रा कर रहे हैं मोदी जी जरा तो सोचिए कि क्या आप कभी या आप की सरकार या आपके द्वारा कभी यह कहा गया कि देश के समस्त सांसदो मंत्रियों विधायकों विधान परिषद सदस्य के वेतन भत्ते एवं समस्त भत्तो का खर्च इस देश की आम जनता अपने खून पसीने की कमाई से वहन कर रही है क्या आप कभी लिखवाना उचित करेंगे इनकी " पे स्लिप " पर मैं जानना चाहता हूं कि हमारी देश के कितने सांसद गरीब है और देश की कितनी प्रतिशत आबादी गरीब है यानि कि जो आबादी गरीब है उसके लिए आप के अलग मापदंड है और आपके स्वयं और आपके मित्र सांसदो के लिए आपके मापदंड अलग है जबकि देश के नेताओ की सुरक्षा और वेतन भत्तों पर लगभग 400 करोड़ खर्च हो रहे है

किस आधार पर सरकार सांसदों को पेंशन का अधिकार देती है जबकि सरकार के द्वारा ही जनवरी 2002 से कर्मचारियों के लिए पेंशन का आधार खत्म कर दिया
मैं इस मंच पर एक स्वतंत्र विचारक एवं भारत वर्ष का एक नागरिक हूं मैं किसी दल का सदस्य नहीं हूं लेकिन मैं इस मंच पर तर्क वितर्क करने के लिए किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति से तैयार हूं