आबकारी विभाग में हुआ 4.35 करोड़ का घोटाला

आबकारी विभाग में हुआ 4.35 करोड़ का घोटाला
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फरीदाबाद : आबकारी विभाग में अब तक सबसे बड़ा घोटाला सामाने आया है। सीएम फ्लाइंग की टीम ने आबकारी विभाग के 6 कर्मचारियों के खिलाफ 4 करोड़ 35 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया है। ठेकेदाराें को दिए गए परमिट में लगी रसीदों का विभाग की वेबसाइट पर दी गई रसीदों से मिलान न होने पर यह फर्जीवाड़ा सामने आया। टीम की शिकायत पर थाना सेंट्रल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।  

क्या था मामला

जानकारी के अनुसार साल में 2017-18 के दौरान छाेड़े गए शराब ठेकों का आबकारी एंव कराधान विभाग ने ऑडिट करवाया, ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया है कि विभाग द्वारा एल 1 (देशी) और एल 13 (अंग्रेजी) के ठेकेदार मैसर्ज विरेंद्र कुमार और नीरज सचदेवा को 37 परमिट जारी किए गए थे। जिसमें एक परमिट साल 2017 और 36 साल 2018 में जारी किए गए थे। नियम अनुसार परमिट जारी करने से पहले संबंधित फर्म की ओर से बेंक चालान की कॉपी निकलवा कर परमिट फीस बैंक के माध्यम से जमा की जाती है। जमा की गई फीस मैनुअल बैंक रसीद (टीआर)  को विभाग की साइट पर अपलोड करने बाद परमिट जारी किया जाता है, लेकिन 37 परमिट में से 1,2,3,5,,20,21,22 में से 7 परमिट ऐसे पाए गए जिसका साइट पर अपलोड की गई रसीद नंबर ऑनलाइन दर्ज ( जीआर ) नंबर से मैच नहीं खा रहे थे। इसके अलावा 34 और 37 पर दर्शाये गए 2 परमिट ऐसे पाए गए, जिनकी मनुअल रसीद साइट पर अपलोड ही नहीं की गई। जबकि जारी किए गए परमिट में जीआर नंबर ( ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन नंबर ) दर्शाया हुअा है। इससे साफ तौर पर पता चलता है कि ठेकेदाराें द्वारा बेंक में सरकारी फीस जमा न होने पर उन्हें अधकारियों की मिली भगत से परमिट जारी कर दिए गए। अधिकारियों की इस मिलीभगत ने सरकार को करीब 89 लाख 76 हजार रुपये का चूना लगाया है।

जांच के दौरान पाया गया है कि परमिट जारी करने से पहले आबकारी विभाग इंस्पेक्टर और आबकारी विभाग अधिकारी ने परमिट जारी करने में फर्जीवाड़ा कर 37 परमिट जारी कर दिए। जिसमें आबाकरी विभाग निरीक्षक बिसंबर दयाल ने 17 और विजय कुमार ने 4, राधे श्याम ने 1, प्रवीन पुजानी ने 15 परमिट वैरीफाई किए थे। इनमें आधार पर 37 परमिट में से एईटीअो अनिल बैनीवाल ने 15 और राकेश शर्मा ने 22 परमिट जारी कर दिये। सीएम फ्लाइंग अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह पाया गया कि आबकारी विभाग अधिकारियों का अधिकार है।

फर्म द्वारा परमिट और अन्य कार्यों में कोई परेशानी आने पर वह अपने कोरपस अधिकार का इस्तेमाल करके परमिट जारी कर सकता है। एईटीओ अनिल बेनिवाल ने 24 और राकेश शर्मा 3 कोरपस कर 27 काेरपस एल 1 और एल 13 के ठेके रघुवीर सिंह फर्म के नाम कर दिये। जिसमें सरकार को 3 करोड़ 46 लाख 21 हजार 490 रुपये की राजस्व हानि हुई है। दोनों अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर घोटाला किया है।

 जो नकली टीआर और कोरपस से सरकार को 4 करोड़ 35 लाख 95 हजार रुपये का चूना लगाया है। इस घोटाले में उप आबकारी कराधान आयुक्त कार्यलय में तैनात निरीक्षक विसंबर दयाल, विजय कुमार, रोधे श्याम, महिला प्रवीन पुंजानी एईटीओ अनिल बैनीवाल और राकेश शर्मा, रघुबीर सिंह, विरेंद्र सिंह, नीरज सचदेवा ने मिलकर ने मिलकर सरकारी राशि का गबन किया है। पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों पर धारा 420 सहित कई धाराएं लगाकर एफआईआर दर्ज कर लिया।

● आबाकरी विभाग के ये अधिकारी घोटाले में फंसे ● 

आबकारी विभाग के उप आबकारी एंव कराधान अधिकारी अनिल बेनीवाल और राकेश शर्मा, इंस्पेक्टर राधेश्याम, प्रवीण पुंजानी, विशंभर और विजय कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनके अलावा   ठेकेदारों में रघुवीर सिंह , वीरेंद्र सिंह और नीरज सचदेवा घाेटाले में शामिल है। 

● अधिकारी का पक्ष ●

फरवरी माह में आबाकरी विभाग की ओर से विभाग की ऑडिट करवाई गई थी। इस दौरान विभाग की वेबसाइट ठेकों से प्राप्त राशि और विभाग के दो अधिकारी और 4 इंस्पेक्टर के नाम में गड़बड़ सामने आई थी। वेबसाइट का कार्य विप्रो कंपनी देख रही है। बेवसाइट में गलत रिपोर्ट दिखाने पर हमने इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई। साथ ही मार्च 2018 में 3 ठेकेदारों के अकाउंट से 4 करोड़ 84 लाख रुपये की रिकवरी कर ली गई। सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
[ सुमन संधु - आबकारी एवं कर उपायुक्त ]

★ऑडिट में सामने आया था फर्जीवाड़ा, जांच के बाद बुधवार को सीएम
फ्लाइंग ने कराई एफआईआर मामला दर्ज 
★ ठेकेदारों को दिए गए परमिट में लगी बैंक रसीदों का जांच में नहीं हो पाया
विभाग की साइट पर दिए गए नंबर से मिलान 
★चेहते ठेकेदारों के लिए अधिकारियों पर कोरपस फंड से भी करोड़ों रुपये लुटाने का आरोप