रेलवे में खेल , अधिकारीयो की मनमर्जी पास और श्रम कानून फेल

रेलवे में खेल , अधिकारीयो की मनमर्जी पास और श्रम कानून फेल
Wednesday, April 11, 2018 - 16:23

जयपुर【 अभिषेक शर्मा 】: जी हां आपको सुनने में भले ही अटपटा लगेगा लेकिन हाल ही में उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल ने श्रम कानून ,रेल मंत्री , प्रधान कार्यालय के अधिकारियों के आदेश को भी जयपुर मंडल विद्युत विभाग ने हवा में उड़ा दिया है मामला जुड़ा है जयपुर मंडल में विद्युत विभाग के द्वारा दी गई निविदा में जहां भारत सरकार ने श्रमिकों के हितों के लिए श्रम क़ानून बना रखा है वही उसी श्रम क़ानून की जयपुर मंडल ( विद्युत विभाग ) जमकर धज्जिया उड़ा रहा है .

उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल बिजली इंजीनियर व टेंडर कमिटी के सदस्यों ने श्रम नियम क़ानून ताक पर रखते हुए ऋषि एंटरप्राइजेज को न्यूनतम वेतनमान से जो की 3 करोड़ 61 लाख का ठेका 18% से लगभग 65 लाख रु कम में दे दिया . जबकि निविदा की महत्वपूर्ण शर्त संख्या :- 10 के अनुसार न्यूनतम वेतनमान ( मिनिमम वेजेज ) से कम में निविदा नहीं डालने का उल्लेख है लेकिन उसके बावजूद जयपुर मंडल के अधिकारियो ने निविदा लेने वाली फर्म के साथ मिलीभगत कर ठेका दे दिया .

गौरतलब है की ऋषि एंटर प्राइजेज के द्वारा अजमेर मंडल में न्यूनतम मजदूरी की पालना नहीं की जा रही है और ना ही PF का दिया जा रहा है और ना ही पूर्व में कर्मचारियों के ESIC का भुगतान जमा कराया गया

जबकि इस मामले की शिकायत उक्त निविदा में भाग लेने वाली फर्मो के द्वारा भी महाप्रबंधक और सतर्कता विभाग को भी की गई लेकिन अधिकारियों ने अपने पद और रसूखात की दम पर सभी शिकायत ठन्डे बस्ते में ड़ालवा दी
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार उक्त मामले में टेंडर कमेटी के एवं अधिकारियों व ठेकेदार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है

■ क्या कहना है इन अधिकारियों के पत्र में ■

न्यूनतम मजदूरी क़ानून की पलना की जावे और न्यूनतम मजदूरी से कम दर पर ठेका ना दिया जावे { अम्ब्रीश कुमार शर्मा - क्षेत्रीय श्रम आयुक्त - जयपुर }

न्यूनतम मजदूरी की पालना की जावे { आर.ऐल.मीणा - उप मुख्य बिजली इंजिनियर - उत्तर-पश्चिम रेलवे }

श्रम क़ानून के मुताबिक व रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार न्यूनतम मजदूरी दी जावे { शशि किरण - Dy CME & En HM }

अब ऐसे में सवाल उठ रहा है जहाँ प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देख रहे है वही रेल अधिकारी, ठेकेदार के साथ मिल कर नियमो का उलंघन कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे है और ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों का शोषण करने पर मजबूर कर रहे है और किस आधार पर ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना " सबका साथ और सबका विकास संभव " है