हनुमान बेनीवाल और तीसरा मोर्चा बनाने वाले अन्य नेताओं के होश गुम ..

हनुमान बेनीवाल और तीसरा मोर्चा बनाने वाले अन्य नेताओं के होश गुम ..
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【 अभिषेक शर्मा 】

चुनाव से 1 साल पहले कांग्रेस, भाजपा की शासन शैली से छुटकारा दिलाने के लिए कई नेता तीसरा मोर्चा बनाने की बड़ी-बड़ी बातें करते है पर जब से राजपा के प्रदेश प्रमुख डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा अपने तीन विधायकों सहित भाजपा में लौट गए तभी से तीसरा फ्रंट गढ़ने वाले खींवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल और तीसरा मोर्चा बनाने वाले अन्य नेताओं के होश गुम नजर आ रहे है। भाजपा की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से खफा चल रहे सांगानेर से विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने राजनीतिक पार्टी दीनदयाल वाहिनी दल का जरूर रजिस्ट्रेशन करवा लिया है साफ नहीं है कि वे भाजपा को छोड़ेंगे या नहीं ।

ऐसे में दो दशकों से राज्य में चुनाव लड़ रही बसपा ही तीसरे फ्रंट के रूप में वजूद में है 2013 के चुनाव में तीन विधायक जिताकर विधानसभा में भी भेजे थे। राज्य विधानसभा की 200 सीटों के लिए 2018 के आम चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और प्रतिपक्ष कांग्रेस के बीच ही होगा। कांग्रेस ने ही उपचुनाव में भाजपा के विधानसभा लोकसभा उम्मीदवारों को पटकनी भी देकर साबित कर दिया कि मुकाबला तो भाजपा-कांग्रेस के बीच ही होना है।

जबकि माकपा भी अपना 2013 के चुनाव में एक भी उम्मीदवार जीता नहीं सकी। बसपा 3 विधायकों की संख्या को बढ़ाने के साथ दावा कर रही है कि भाजपा सरकार की कार्यशैली कांग्रेस के पिछले शासन को देखते हुए इस बार राज्य में बसपा तीसरी पार्टी से पहली पार्टी सभी 200 सीटों पर चुनाव लड़कर बनेगी। यही हाल कांग्रेस के दावे का वर्तमान समय की राजनीति को देखने से मिल रहा है प्रदेश में हुए 22 उपचुनाव में से 20 में जीत हासिल करने वाली कांग्रेस भाजपा के इस दावे 180 सीटें जीतेगी को कोरी गप्प बताते हुए प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट दावा करते है कि भाजपा शासन शैली से जनता प्रतिशोध लेने के इंतजार में बैठी है। प्रदेश में तीसरे मोर्चे के गठन वाले नेताओं की बात करते है तो डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भाजपा में आशियाना ढूंढ लिया है तिवाड़ी के दल का भरोसा लोगों को कम हो रहा है कि धरातल पर उतरेगा या फाइल में दबा रह जाएगा।

हनुमान बेनीवाल ने किसान जयपुर से दूर बड़े कैपिटल शहरों में रैली आयोजित पर भाप लिया कि अपना दल बनाकर उसके बैनर पर चुनाव लड़कर कामयाब होना नामुमकिन सा लगता है, अपुष्ट खबर है कि बेनीवाल बहुजन समाज पार्टी से हाथ मिलाना चाहते है तो दूसरी ओर किरोड़ी लाल मीणा को भाजपा ने राज्यसभा भेजा है उसे भी बेनीवाल की दोस्ती के केसरिया के रंग में रंग सकती है फिलहाल राजस्थान की राजनीति में केवल सत्ताधारी भाजपा और प्रतिपक्ष में बैठी कांग्रेस मे आमने-सामने का मुकाबला है। बसपा तीसरे फ्रंट के रूप में अपना वजूद बचाए हुए है ऐसे में तीसरा मोर्चा गढ़ने वाले नेताओं के होश पस्त दिख रहे है फिलहाल तो मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस ही नजर आ रही है