बाल विवाह समाज व जीवन के लिए एक अभिशाप - मुख्य न्यायधीश

बाल विवाह समाज व जीवन के लिए एक अभिशाप - मुख्य न्यायधीश
Sunday, April 1, 2018 - 22:33

दौसा, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री जी आर मूलचन्दानी ने कहा कि राजस्थान में अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा एवं अन्य अबूझ सावों पर बाल-विवाह सम्पन्न होते है, जिनके दुष्परिणाम बच्चों के साथ-साथ पूरे समाज को भोगने पडते हैं। बाल-विवाह जैसी सामाजिक बुराई एवं इसके दुष्परिणामों एवं बाल-विवाह रोकने के संबंध में प्रभावी कानूनी प्रावधानों के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से आमजन मे चेतना जागृत करना जरूरी है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा रविवार को कोर्ट परिसर में आयोजित बाल विवाह रोकथाम अभियान के शुभारम्भ समारोह को संबोधित करते हुये न्यायाधिपति ने यह बात कही। उन्होने कहा कि बाल विवाह समाज व जीवन के लिए एक अभिशाप है। जिन बालक व बालिकाओ का बाल विवाह होता है उनका शारीरिक व मानसिक विकास अवरूद्ध हो जाता है। आधुनिक जमाने मे बाल विवाह प्रतिबंधित है और बाल विवाह कई अन्य सामाजिक बुराईयो की जड़ है यह कुरीति बचपन मे विवाह करने वाले लोगो के शरीर व आत्मा पर प्रभाव डालती है। बाल विवाह को रोकने हेतु सामाजिक जागरूकता जरूरी हैं।

न्यायाधिपति ने कहा कि बाल विवाह रूपी सामाजिक विकृति को रोकने के लिए कानून होने के बाबजूद हर साल बडी संख्या मे नाबालिक कच्ची उम्र मे ही विवाह बंधन मे बंध जाते है। खेलने -कूदने व पढ़ने लिखने की उम्र वाले इन बच्चो को सही मायने मे शादी शब्द के सही अर्थ पता नही होते, फिर भी माता पिता खर्च बचाने व सामाजिक परम्पराये निभाने के नाम पर बच्चो की जिन्दगी से खेल जाते है। बाल विवाह के दुष्परिणाम तलाक व खुदकुशी के रूप मे भी सामने आते हैं और कच्ची उम्र मे किया गया बंधन पक्का नही रहता। बाल विवाह की कुरीति के गंभीर परिणामो के बाद भी लोगो को अपनी जिम्मेदारी का अहसास नही हो रहा है। बाल विवाह रोकथाम हेतु विभिन्न गोष्ठियो/बैठको का आयोजन कर आमजन में चेतना जागृत करना जरूरी है।

समारोह मे जिला कलक्टर नरेश कुमार शर्मा ने कहा कि बाल-विवाह से बच्चों द्वारा पढाई छोडने की घटना में वृद्धि होती है, लडकियों पर समय से पहले घरेलू काम-काज की जिम्मेदारी आ जाती है, शिशु मृत्यु दर व अस्वस्थता दर में वृद्धि होती है तथा बाल-विवाह बच्चों के सम्पूर्ण विकास में बाधक है। जिले में बाल विवाह पर नियंत्रण के लिए सभी अधिकारी, कर्मचारील टीम भावना से काम करे तथा आमजन में बाल विवाह के प्रति चेतना जागृत करते हुये सहयोग की भावना से कार्य करे।

समारोह में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जिला एवं सैशन न्यायाधीश अनूप कुमार सक्सैना ने कहा कि जिले में बाल विवाह एक गंभीर समस्या के रूप में मौजूद है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिवर्ष आखा तीज, पीपल पूर्णिमा एवं अबूझ सावों पर बडी संख्या में बाल विवाह सम्पादित होने की संभावना होती है, जिन्हें रोकने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व प्रशासन की ओर से भरकस प्रयास किये जाते हैं और लोगों को बाल-विवाह रोकथाम के प्रति जागरूक करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दौसा द्वारा गठित अवेयरनेस टीम के सदस्यों द्वारा विधिक जागरूकता कैंपों का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर द्वारा जारी मासिक एक्शन प्लान के अनुसार किया जाता है। इसके अलावा मोबाईल वैन के माध्यम से भी विधिक जागरूकता टीम के सदस्य गॉंव-गॉंव में बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करते हैं और इसके संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दौसा द्वारा प्रकाशित सामग्री भी वितरित की जाती है।

इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक चूना राम जाट ने कहा कि जिले में बाल विवाह पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी सक्रिय रह कर टीम भावना से कार्य करे।जिले में आमजन में भरोसा कायम कर बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणामों से लोगों को अवगत करवाना होगा। जिलें में अबूझ सावो का दौर शुरू होते ही पुलिस प्रशासन जागरूक हो जाता है तथा बाल विवाह रोकने हेतु पूर्ण प्रयास किये जाते है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दौसा द्वारा बाल-विवाह रोकथाम अभियान के तहत आज रविवार को शिक्षा विभाग के समन्वय से दौसा मुख्यालय से छात्र-छात्राओं की रैली को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री जी आर मूलचन्दानी , जिला एवं सैशन न्यायाधीश अनूप कुमार सक्सैना द्वारा हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया।

उन्होंने बताया कि दौसा जिले में बाल विवाह एक गंभीर समस्या के रूप में मौजूद है। उनके द्वारा उपस्थित लोगों को बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिवर्ष आखा तीज, पीपल पूर्णिमा एवं अबूझ सावों पर बडी संख्या में बाल विवाह सम्पादित होने की संभावना होती है जिन्हें रोकने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व प्रशासन की ओर से भरकस प्रयास किये जाते हैं और लोगों को बाल-विवाह रोकथाम के प्रति जागरूक करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दौसा द्वारा गठित अवेयरनेस टीम के सदस्यों द्वारा विधिक जागरूकता कैंपों का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर द्वारा जारी मासिक एक्शन प्लान के अनुसार किया जाता है। इसके अलावा मोबाईल वैन के माध्यम से भी विधिक जागरूकता टीम के सदस्य गॉंव-गॉंव में बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करते हैं और इसके संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दौसा द्वारा प्रकाशित सामग्री भी वितरित की जाती है।

इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दौसा द्वारा उपस्थित लोगों एवं बालकों को बाल-विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया तथा इसकी रोकथाम हेतु बने बाल-विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के संबंध में जानकारी देते हुये बताया गया कि अधिनियम में बाल विवाह में सहयोग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह बच्चों के माता-पिता हों,चाहे बाल विवाह में शामिल नातेदार-रिश्तेदार हों, चाहे बाल विवाह संपादित करने वाला पंडित अथवा टैंट वाला अथवा हलवाई हो, सभी को दो वर्ष तक के कठोर कारावास एवं एक लाख तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दौसा के पूर्णकालिक सचिव द्वारा उपस्थित आमजन एवं बालकों को बताया कि साथ ही उनके द्वारा बाल-विवाह की रोकथाम हेतु जिला कलक्ट्रेट दौसा में बने कंट्रोल रूम में शिकायत करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गयी। इस अवसर पर बार एशोशियन के अध्यक्ष दिनेश जोशी ने भी विचार व्क्त किये। कार्यक्रम का संचालन श्रमती कमला शर्मा ने किया। कार्यक्रम के दौरान कलाजत्था के कलाकारों ने बाल विवाह नियंत्रण पर गीत की प्रस्तुती देते हुये आमजन में चेतना जागृत करने का काम किया।