इंदौर : जिंदादिल इंसान थे सेठ साहब , इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित सद्भावना सभा में बोले विभिन्न राजनीति, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि

इंदौर : जिंदादिल इंसान थे सेठ साहब , इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित सद्भावना सभा में बोले विभिन्न राजनीति, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि
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इंदौर। पत्रकारिता एवं राजनीति को दिशा देने वाले, शहर के विकास में अग्रणीय भूमिका निभाने वाले और बिना लाग-सपेट के अपनी बात कहने वाले थे जिंदादिल इंसान श्री सेठ साहब। उन्होंने राजबाड़ा और लालबाग को बचाया, वहीं चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये विचार विभिन्न पत्रकारों एवं सामाजिक व राजनीतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के हैं, जो उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार, इंदौर समाचार के प्रधान संपादक, पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश, इंदौर के पूर्व महापौर एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुरेश सेठ को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित सद्भावना सभा में श्रद्धांजलि देते हुए व्यक्त किए।
इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी कहा कि श्री सेठ साहब न भूतो न भविष्यति। वे अपनी बात निर्भीकता तथा बेबाकी के साथ कहते थे। उनमें सच को सच कहने का साहस था और वे सही व्यक्ति को पहचानने का माद्दा रखते थे। पत्रकारिता को लेकर भी उनकी बहुतसी चिंताएं थीं। पूर्व सांसद एवं समाजवादी नेता कल्याण जैन ने कहा कि सेठ साहब से मेरा दिली रिश्ता था। वे स्वभाव से ही विद्रोही थे। वे ऐसे व्यक्ति थे, जो ताकतवर के सामने भी निर्भीकता के साथ सदैव खड़े रहते, वहीं कमजोर को उसकी गलतियों के लिए नजरअंदाज कर देते थे। वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने कहा कि सेठ साहब को पत्रकारों की सदैव चिंता रहती थी। उन्होंने न केवल शहर की शान राजबाड़ा को बचाया वरन शहर को चाचा नेहरू जैसे अस्पताल की सौगात दी। वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह ने श्री सेठ से जुड़ी यादें ताजा की। पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष जीवन साहू ने कहा कि सेठ साहब अजातशत्रु थे। उन्होंने शहर को सरबटे बस स्टैंड, रवीन्द्र नाट्यगृह सहित नेहरू प्रतिमा, शिवाजी प्रतिमा के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वरिष्ठ पत्रकार सतीश जोशी ने कहा कि सेठ साहब ऐसे व्यक्ति थे, जो राजनीति और पत्रकारिता में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ थे और मौका आने पर अपनी सरकार के खिलाफ हमेशा आवाज उठाते।
नगर भाजपा अध्यक्ष कैलाश शर्मा ने कहा कि सेठ साहब ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने नर के रूप में जन्म लिया लेकिन अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से नारायण स्वरूप बन गए। उन्होंने विधानसभा में धारा 370 को हटाने की बात कही थी। पूर्व विधायक अश्विन जोशी ने कहा कि सेठ साहब ने निजी स्वार्थों को ताक पर रखकर राजनीति और पत्रकारिता की। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता उमेश शर्मा ने कहा सेठ साहब संस्कारों की पूंजी के सेठ थे, उन्होंने अपना जीवन शेर की तरह जिया। वरिष्ठ भाजपा नेता गोविंद मालू ने कहा कि सेठ साहब बिरले व अनूठे व्यक्ति थे, जिन्होंने जनता के दिलों पर राज किया। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि सेठ साहब ने इंदौर को मूल्यों और सिद्धांतों में नंबर वन बनाया। वे असफलताओं से घबराएं नहीं और हारने के लिए सदैव तैयार रहे। वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने कहा कि सेठ साहब की महानता को शब्दों में बया नहीं किया जा सकता। वरिष्ठ पत्रकार नरेश तिवारी ने कहा कि सेठ साहब का मानना था कि संघर्षों को निर्णायक तक ले जाओ और ईमानदारी को कभी मत छोड़ो। वरिष्ठ पत्रकार उमेश रेखे ने कहा कि सेठ साहब बड़े हितेषी, दानवीर और अपने अधिनस्थों के सुख-दुख में सदैव साथ खड़े रहते थे। सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने कहा कि सेठ साहब संघर्षों से कभी घबराए नहीं। उनकी याददाश्ता बहुत तेज थी। वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश फरक्या ने कहा कि सेठ साहब धुन के पक्के थे। वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मिश्रा ने कहा कि सेठ साहब समझौतावादी नहीं थे। कांग्रेस नेता राजेश चौकसे ने कहा कि सेठ साहब व्यक्ति नहीं संस्था थे और वे शहर के हितों के लिए सदैव चिंतित रहते थे। अभ्यास मंडल के सुनील माकोड़े ने कहा कि सेठ साहब अपनी बात बेबाकी से कहते थे। उनका जीवन पारदर्शी था। अशोक कोठारी ने कहा कि इंदौर के विकास के लिए सदैव चिंता करते थे सेठ साहब। अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता ने कहा कि सेठ साहब जुझारू नेता थे और सच को सच कहने में जरा भी नहीं डरते थे।
सभा में कांग्रेस नेता अनिल यादव, भाजपा मीडिया प्रभारी देवकीनंदन तिवारी, राजा शर्मा, प्रदीप जोशी, अतुल लागू, संजय त्रिपाठी, प्रवीण जोशी, सुधाकर सिंह सहित बड़ी संख्या में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद। सभा का संचालन इंदौर प्रेस क्लब महासचिव नवनीत शुक्ला ने किया।