गांधी परिवार अब प्रियंका को चुनाव लड़ाने का मन बना चुका है...

गांधी परिवार अब प्रियंका को चुनाव लड़ाने का मन बना चुका है...
Saturday, April 14, 2018 - 12:43

नई दिल्ली (सोनाली यादव) दिल्ली के इंडिया गेट पर आधी रात को प्रियंका गांधी वाड्रा का अलग अंदाज़ देखने को मिला. कांग्रेस के कैंडल मार्च में अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल होंगे यह पहले से तय था लेकिन पार्टी के बड़े-बड़े नेता भी नहीं जानते थे कि प्रियंका गांधी भी वहां धरने पर बैठने वाली हैं. उन्हें वहां देखकर नेता भी चौंके और पत्रकार भी. आधी रात जो हुआ उसकी चर्चा कांग्रेस में तो है ही, भाजपा में उससे ज्यादा है.

प्रियंका के लौटने के बाद जब कुछ पत्रकारों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के लहजे में पूछा कि प्रियंका गांधी वहां क्यों आई थीं तो उनका जवाब बेहद दिलचस्प था. कांग्रेस के एक बड़े नेता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘आधी रात के वक्त इंडिया गेट पर मोमबत्ती लेकर निकलने का आइडिया कांग्रेस की परंपरागत सोच से एकदम अलग है. मुझे तो लगता है यह नई सोच प्रियंका गांधी की ही होगी.’

कठुआ और उन्नाव की घटना पर जिस तरह सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनल्स और अखबारों में भाजपा, यूपी की योगी सरकार और जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार की आलोचना हुई उससे कांग्रेस ने एकदम आक्रामक होने का फैसला कर लिया. जब ट्विटर पर देश के बड़े-बड़े फिल्म सुपरस्टार इन भयावह अपराधों पर अपनी राय जाहिर करने लगे तो कांग्रेस की कोर टीम को संदेश आया कि आधी रात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष कैंडल मार्च पर निकलेंगे. पहले पार्टी एक दिन रुककर तैयारी करना चाहती थी, लेकिन जल्द ही उसके शीर्ष नेतृत्व को समय की कीमत का अहसास हो गया. इसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं को 24 अकबर रोड पहुंचने का आदेश दिया गया.

प्रियंका गांधी की टीम में काम करने वाले एक व्यक्ति बताते हैं कि ‘प्रियंका मैम रात आठ बजे के बाद से ही एक्टिव थीं और एक-एक बड़े नेता को फोन किया गया. लेकिन उस वक्त किसी को ये नहीं बताया गया कि वे भी आने वाली हैं. मार्च में प्रियंका शामिल होंगी, शुरू में यह बात सिर्फ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा ही जानते थे.

इंडिया गेट पर जिस तरह से प्रियंका ने मीडिया से लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को डांटा उसकी तारीफ कई लोगों से सुनी जा सकती है. राहुल गांधी अपनी गाड़ी की छत पर बैठकर मीडिया से बात कर रहे थे, लेकिन प्रियंका गांधी ज़मीन पर ही बैठ गईं. इस पर कांग्रेस की एक महिला नेता कहती हैं, ‘प्रियंका का ये अंदाज़ पहले नहीं देखा था. वे बड़े आराम से सड़क पर बैठी थीं. महिलाओं से बात कर रही थीं. आंखों में गुस्सा था, सभी कार्यकर्ताओं को समझा-बुझा रही थीं. उन्हें आंदोलन बढ़ाने के लिए टिप्स दे रही थीं’.

यह पहला मौका था जब प्रियंका ने कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में इस आक्रामक तरीके से हिस्सा लिया और कैमरे से दूर भी नहीं रहीं. अब तक वे ज्यादातर पर्दे के पीछे ही भूमिका निभा रहीं थीं. सुनी-सुनाई है कि अब प्रियंका गांधी धीरे-धीरे सामने आएंगी. कांग्रेस के एक नेता बातों-बातों में बताते हैं कि सोनिया गांधी अपने दोनों बच्चों से निजी बातचीत में कह चुकी हैं कि अब वे सियासत से रिटायर होना चाहती हैं. ऐसे में परिवार में प्रियंका गांधी को आगे लाने पर चर्चा शुरू हो गई है.

कांग्रेस इस बार लोकसभा का चुनाव पूरी ताकत से लड़ने का मन बना रही है. अभी अमेठी से राहुल गांधी, रायबरेली से सोनिया गांधी और सुल्तानपुर से भाजपा के वरुण गांधी सांसद हैं. वरुण भाजपा से बेहद नाराज़ हैं और प्रियंका गांधी से उनकी लगातार बातचीत भी होती रहती है. कांग्रेस पर नज़र रखने वाले एक पत्रकार की मानें तो फिलहाल वरुण की मां मेनका गांधी उनके कांग्रेस में जाने के सख्त खिलाफ हैं. लेकिन जिस तरह से वरुण भाजपा में हाशिये पर पहुंच चुके हैं वैसे में मेनका के पास भी ज्यादा विकल्प नहीं है. खबर है कि ऐसे हालात में सूरत यह बन सकती है कि अमेठी से राहुल गांधी, रायबरेली से प्रियंका गांधी और सुल्तानपुर से वरुण गांधी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ें. यानी कि अगले आम चुनाव में अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर की सीटों से गांधी परिवार के ही उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं.

प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा भी सक्रिय राजनीति करने की इच्छा रखते हैं. अगर परिवार ने फैसला किया तो वे मुरादाबाद सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं. प्रियंका को चुनावी मैदान में उतारने की पैरवी कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता लगातार दस जनपथ से करते आए हैं. कांग्रेस के इन्हीं नेताओं के मुताबिक अब तक खुद सोनिया गांधी उन्हें चुनाव लड़ाने के लिए तैयार नहीं थीं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं. अब राहुल गांधी को भी अंदाजा हो गया है कि प्रियंका गांधी की सबसे ज्यादा जरूरत उन्हें ही है. प्रियंका के एक करीबी शख्स के मुताबिक ‘वे अपना रोल कुछ वैसा ही रखना चाहती हैं जैसा उन्होंने इंडिया गेट के मार्च के दौरान रखा था. वे हिंदुस्तान की महिलाओं के मुद्दे उठाएंगी ताकि पार्टी का देश के महिला वोट बैंक से सीधा संपर्क बन सके. इस तरह राहुल और प्रियंका एक दूसरे के पूरक होंगे प्रतियोगी नहीं’.

जानकार मानते हैं कि कांग्रेस ने अब करीब-करीब फैसला कर लिया है कि 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को टक्कर देने के लिए राहुल को अकेला मैदान नहीं छोड़ा जा सकता. उन्हें इस मुकाबले के लिए एक विश्वस्त और काबिल सहयोगी की जरूरत है जो प्रियंका गांधी ही हो सकती हैं.