प्रगति के पथ पर ,शोषण के रथ पर : स्वच्छता अभियान

प्रगति के पथ पर ,शोषण के रथ पर : स्वच्छता अभियान
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जयपुर : [ अभिषेक शर्मा ] जी हां आपको पढ़ने में भले ही अटपटा लगे लेकिन हकीकत स्थिति यह है कि जहां एक तरफ केंद्र सरकार के द्वारा स्वच्छ भारत अभियान को लेकर करोड़ों रुपए विज्ञापन पर खर्च किए जा रहे हैं और आम जनता से सेस चार्ज के रूप में करोड़ों रुपए टैक्स वसूला जा रहा है वहीं दूसरी तरफ उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं  मामला जुड़ा है जयपुर मंडल से जहां पर स्वच्छता के लिए करोड़ों खर्च हो रहे हैं लेकिन उनकी देखरेख करने वाले स्वास्थ्य निरीक्षकों का जमकर घोर शोषण किया जा रहा है।

RTI  से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर मंडल मे रेलवे बोर्ड की पॉलिसी के अनुसार  A1,A, B श्रेणी के स्टेशनों  को मिलाकर लगभग स्वास्थ्य निरीक्षकों के  23 पद  स्वीकृत होने चाहिए लेकिन यहां पर हालात बिल्कुल उलट है। जयपुर मंडल में सफाई व्यवस्था की देखरेख के लिए बनाए गए विभाग EnHM विंग, जिसमें अधिकारियों का तो पदस्थापन किया गया लेकिन मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक एवं स्वास्थ्य निरीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों की लंबे समय से चली आ रही कमी के लिए आज तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई

जब इस मामले की पड़ताल हमारे संवददाता अभिषेक शर्मा ने की तो चौकाने वाली बात सामने आयी की 21 जुलाई 2016 में वाणिज्य विभाग ने भी स्वास्थ्य निरीक्षकों के 14 पदों की कमी मानी और पद सर्जन के लिए पत्र लिखा लेकिन हालात जस के तस है सबसे हैरानी वाली बात ये रही की आज भी मात्र पूरे जयपुर मंडल के प्रमुख स्टेशनो पर मात्र 8 निरीक्षक ही कार्यरत है जिससे कर्मचारियों को समय पर विश्राम नही मिल रहा है और उनकी कार्य क्षमता भी प्रभावित हो रही है ।

किन रेलवे स्टेशनों पर है कमी

जयपुर में 4,रेवाड़ी में 3 , अलवर में 2, बांदीकुई में 1 ,गांधी नगर में 2 ,फुलेरा में 1 पद रिक्त है

किन रेलवे स्टेशनों पर नही स्वास्थ्य निरीक्षक

सीकर,किशन गढ़ ,दुर्गापुरा में पद रिक्त पड़े है

अब ऐसे में सवाल उठता है कि जहां सरकार रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाना चाहती है और स्वच्छ भारत का सपना देख रही हैं वही सफाई व्यवस्था देखने वाले मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक एवं स्वास्थ्य निरीक्षक उपलब्ध ही नहीं है अब ऐसे में सवाल उठता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का सपना कैसे सफल होगा।

एक तरफ रेलवे स्टेशनों की सफाई के लिए रेलवे स्टेशनों पर सफाई के लिए करोडों रुपये के ठेकेे दे रही है वही इन ठेको के कार्य की देखरेख और संचालन के लिए रेलवे के पास न के बराबर निरीक्षक उपलब्ध है फिर भी रेलवे कहती है " प्रगति के पथ पर ,उन्नति के रथ पर " का दावा कर रही है, वर्तमान स्थिति को देखकर तो ये ही लगता है कि उत्तर पश्चिम रेलवे स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत अभियान को मज़ाक बनाने पर तुली है और सफ़ाई व्यवस्था को भगवान भरोसे ही छोड़ रखा है.।.