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एक दिन का रेलमंत्री बनने का ऑफर, फिल्म 'नायक' के सीन की दिलाई याद : मीडियाकर्मी को दिया ऑफर

एक दिन का रेलमंत्री बनने का ऑफर, फिल्म 'नायक' के सीन की दिलाई याद : मीडियाकर्मी को दिया ऑफर
Tuesday, June 12, 2018 - 14:36
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हो सकता है कि फिल्म 'नायक' की तर्ज पर देशवासी जल्द ही देश में एक दिन का रेलमंत्री भी देख लें, क्योंकि रेलमंत्री पीयूष गोयल ने एक पत्रकार को एक दिन के लिए रेलमंत्री बनने का ऑफर दिया है। ये मामला मोदी सरकार के कार्यकाल के चार साल पूरे होने पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान का है। गोयल पिछले चार साल में रेल मंत्रालय की उपलब्धियों के बारे में बता रहे थे। इसी दौरान एक मीडियाकर्मी ने रेल विभाग से जुड़ी समस्याओं को लेकर सुझावों से भरा एक पत्र गोयल को सौंपा।रेलमंत्री ने दे दिया ऑफर...

मीडियाकर्मी ने जब रेलमंत्री को वो लेटर दिया, उसे देखने के बाद रेलमंत्री मुस्कुराने लगे। इसके बाद उन्होंने वो किया जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था।
उस लेटर को देखने के बाद रेलमंत्री ने उस पत्रकार को एक दिन के लिए रेलमंत्री बनने का ऑफर दे दिया।

गोयल ने फिल्म 'नायक' का जिक्र करते हुए कहा, 'नायक फिल्म की तरह एक दिन के लिए आप मेरी जगह ले लो और खुद नियम कायदों को लागू कराओ।'

रेलमंत्री की ये बात सुनकर वहां मौजूद लोगों को लगा कि वे मजाक में ये बात कह रहे हैं, लेकिन वे अपनी बात को लेकर सीरियस थे। उन्होंने वहां मौजूद रेल बोर्ड के चैयरमैन से इस तरह का एक मॉक इवेंट भी आयोजित करने के लिए कहा। हालांकि इसके साथ ही ये भी कहा कि 'ताकि सबका मनोरंजन हो सके।'

बता दें कि पिछले कई महीनों से ट्रेनों की लेटलतीफी की वजह से रेल मंत्रालय की काफी किरकिरी हो रही है। इस दौरान कई ट्रेनों ने तो देरी का नया रिकॉर्ड भी बना डाला। हालांकि विभाग ने मेंटेनेंस की बात कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। जिसके बाद खुद रेलमंत्री ने आगे आकर सभी डीआरएम को चेतावनी देते हुए कहा था कि ट्रेनें अगर वक्त पर नहीं चलेंगी तो उनके प्रमोशन रोक दिए जाएंगे।

पूरा फोकस सिक्यूरिटी पर है

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीयूष गोयल ने ये संकेत भी दिए कि ट्रेनों की लेट-लतीफी से अभी निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। गोयल ने कहा, 'अभी रेलवे का पूरा फोकस सुरक्षा पर है। हर स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगा रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा कोचों में कैमरे लगाने की कोशिश है।

'ट्रेन देरी से पहुंचने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े काम का बैकलॉग विरासत में मिला है। उसे पूरा करने के चलते ट्रेन परिचालन में देरी हो रही है।

'रेलवे सुरक्षा कोष से ट्रैक की मरम्मत तेजी से जारी है। ट्रेनों का समय और सिग्नल व्यवस्था सुधारने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा, '18 साल में ट्रेनों की संख्या लगभग दोगुना हुई है, लेकिन इस दौरान मूलभूत ढांचों की मरम्मत एवं रखरखाव नहीं हुई।'

सुरक्षा और मरम्मत के लिए यात्रियों को कुछ तो कीमत चुकानी होगी। भविष्य में इसका फायदा दिखेगा। गोयल ने बताया कि 2013-14 में 118 ट्रेन हादसे हुए थे, जो 2017-18 में घटकर 73 रह गए।

- रेलवे के निजीकरण और जीआरपी तथा आरपीएफ को मिलाकर एक बल बनाने के बारे में पूछने पर गोयल ने कहा, 'अभी ऐसी कोई योजना नहीं है।'