" खाएंगे और खाने देंगे " रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड का कोई नियंत्रण नहीं भ्रष्टाचार पर

" खाएंगे और खाने देंगे " रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड का कोई नियंत्रण नहीं भ्रष्टाचार पर
Published Date:
Monday, June 11, 2018 - 13:07

जयपुर : एक तरफ रेलमंत्री पीयूष गोयल रेलवे में भ्रष्टाचार के खिलाफ न सिर्फ सख्त रवैया अपनाए जाने का सार्वजनिक बयान देते नजर आते हैं, बल्कि कई बार बैठकों के दौरान वह रेल अधिकारियों को अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्ट और कामचोर कहने से भी नहीं चूके हैं. दूसरी तरफ वह भ्रष्ट अधिकारियों को प्रश्रय भी देते दिखाई दे रहे हैं. यह ठीक है कि मंत्रिमंडलीय समकक्षों के साथ ही तमाम सांसदों की भी सिफारिशों को सभी मंत्रालयों के मंत्रियों द्वारा पूरी तवज्जो दी जाती है, मगर घोषित भ्रष्ट, चोर, चापलूस और चरित्रहीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मंत्रियों का संरक्षण मिलना न सिर्फ पूरी प्रशासनिक और सरकारी मशीनरी के लिए हानिकारक है, बल्कि ऐसे ही सरकारी कर्मचारी और अधिकारी जल्दी ही सरकार और मंत्री की नाकामी तथा बदनामी का कारण भी बनते हैं.
यही कारण है कि रेलवे के ऐसे ही कुछ अधिकारियों की बदौलत पिछले चार सालों से रेलवे में जमीनी कामकाज कम, बकवास और लफ्फाजी ज्यादा हो रही है.

जानिये क्या है मामला

देश केउत्तर-पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल में करोडो रुपये का घोटाला सामने आया है। यह घोटाला (वातानुकूलित )ऐ.सी कोचों के बेडरोल ( चद्दर,तौलिया,कम्बल ) की धुलाई के नाम पर ठेका लेने वाली कम्पनी स्पार्कल लॉन्ड्री सर्विस के द्वारा किया जा रहा था।हाल ही में जयपुर मंडल में मैकेनिकल विभाग के कैरेज एंड बैगेन का नया घोटाला सामने आया है , मेकेनिकल विभाग जयपुर मंडल के वरिष्ठ अनुभाग अभियंता ( लिनेन ) संजय गुप्ता , मंडल के अधिकारियों की और ठेका लेने वाली कंपनी स्पार्कल लॉन्ड्री सर्विस के मालिक राजकुमार की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है उक्त मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है !रेलवे की सभी गतिविधियां ऑनलाइन होने के बाद रेलवे हुए घोटालों का नियमित अंतराल पर खुलासा हो रहा है। इससे रेलवे अधिकारी चिंतित हैं। ।

सूत्र बताते हैं कि यह घोटाला मैकेनिकल विभाग और ठेकेदार के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से हो रहा था। इसमें ठेके में कार्यरत कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर और उनको ( S.S.E ) वरिष्ठ अनुभाग अभियंता ( लिनेन ) संजय गुप्ता ने प्रमाणित कर रेलवे से बिल पास करवाकर करोडो रुपये की चपत लगाई गई और ठेकेदार को अनैतिक लाभ पहुंचाया । और आज तक कर्मचारियों को भुगतान नहीं मिला जबकि रेलवे के रिकॉर्ड में भुगतान हो गया और कर्मचारियों को अभी तक बैंक खातों का पता नहीं है

सूत्रों के अनुसार यह घोटाला (वातानुकूलित )ऐ.सी कोचों के बेडरोल ( चद्दर,तौलिया,कम्बल ) की धुलाई के नाम पर होता था, अब तक इससे काम करने वाले कर्मचारियों को कितनी चपत लग चुकी है, इसका खुलासा तो अब पुलिस जांच में होगा।

क्या है नियम

रेलवे के द्वारा दी गई निविदा शर्तो के अनुसार काम ठेके में करने वाले सभी कर्मचारियों का सरकारी नियमानुसार ( PF ,ESI ) का भुगतान प्रतिमाह होना चाइये और वेतन भुगतान बैंक के द्वारा होना चाहिए

जब इस मामले में ठेकेदार और रेलवे के अधिकारियों से बात करना चाही तो कोई भी जवाब देने और खुल कर बोलने को तैयार नहीं है गौरतलब है की उक्त प्रकरण का मंडल और जोन के सभी अधिकारियों को पता है लेकिन अधिकारी इस मामले पर कार्रवाई करने से बच रहे है