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थर्मल एवं नव्यकरणी उर्जा का सही मिश्रण होगा विद्युत उत्पादन का भविष्य- विद्युत मंत्री आर के सिंह

थर्मल एवं नव्यकरणी उर्जा का सही मिश्रण होगा विद्युत उत्पादन का भविष्य- विद्युत मंत्री आर के सिंह
Friday, September 28, 2018 - 19:12
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नई दिल्ली। ‘‘इस बदलाव एवं विकास के दौर में अर्थव्यवस्था एवं प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के साथ विद्युत की मांग 6 प्रतिशत के अधिक और आने वाले समय में और तेज़ी से बढ़ेगा। ऐसे में ज़रूरी है कि हम पर्यावरण संरक्षण एवं स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए नव्यकरणीय उर्जा को अपनाएं।’’ आर. के. सिंह, केन्द्रीय विद्युत और नवीन एवं नव्यकरणीय उर्जा मंत्री ने एनटीपीसी के सम्मेलन ‘‘पावन प्लोंट का सुगम संचालनः हरित ग्रिड के लिए करेगा मार्ग प्रशस्तश् का उद्घाटन करते हुए कहा। अजय कुमार भल्ला, सचिव, विद्युत मंत्रालय; पंकज बत्रा, चेयरमैन, सीईए तथा गुरदीप सिंह, सीएमडी, एनटीपीसी भी इस मौके पर मौजूद थे। 

हम कुल क्षमता का 40 फीसदी उत्पादन नव्यकरणीय स्रोतों से करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और 2030 तक इस क्षमता को बढ़ाना हमारा लक्ष्य है। सिंह ने कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नव्यकरणी एवं थर्मल उर्जा दोनों का मिश्रण विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल है और इस तरह के मंच नव्यकरणी उर्जा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। थर्मल पावर से विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खनन को सशक्त बनाना ज़रूरी है, ये सभी प्रयास अर्थव्यवस्था में सुधार लाकर समाज के निम्न वर्ग को फायदा पहुंचाएंगे।  

इस मौके पर सिंह ने वेब पोर्टल का लॉन्च भी किया जो देश भर में उत्पादन युनिट्स का ई-पंजीकरण है और उत्पादन, संचरण, वितरण एवं कारोबार से जुड़े सभी पावर प्लांट्स के लिए डेटाबेस की भूमिका निभाएगा। अजय कुमार भल्ला, सचिव, विद्युत मंत्रालय ने भारत सरकार की नीतियों में प्रत्यास्थता, नज़दीकी स्थानों से कोयले की आपूर्ति, कोयले एवं नव्यकरणी स्रोतों के मिश्रण के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उचित नव्यकरणीय उर्जा में निवेश द्वारा प्लांट्स को प्रत्यास्थ बनाया जा सकता है। 

इस मौके पर पंकज बत्रा, अध्यक्ष, सीईए ने कहा, ‘‘सीईए नव्यकरणी उर्जा के समेकन के लिए योजनाएं बना रही है। हमारे पास कोयले से बिजली बनाने की क्षमता बहुत अधिक है, जिसका उचित इस्तेमाल किया जा सकता है। सीईए, एनटीपीसी के साथ मिलकर नव्यकरणी उर्जा के समेकन तथा पावर प्लांट में कोयले के उचित इस्तेमाल पर काम कर रही है।’’ 

इस मौके पर गुरदीप सिंह, सीएमडी, एनटीपीसी ने कहा, ‘‘पावर प्लांट्स को प्रत्यास्थ बनाना समय की मांग है और सभी विद्युत उत्पादकों के लिए इसे अपनाना ज़रूरी है। हमें कार्बन फुटप्रिन्ट को कम कर नव्यकरणी उर्जा को प्रोत्साहित करना होगा। नव्यकरणी उर्जा का समेकन बेहद महत्वपूर्ण है। हमारे पास हाइड्रो एवं कोयला प्लांट्स के लिए सीमित संसाधन हैं और किफ़ायती विद्युत की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इनमें बदलाव लाए जा रहे हैं।’’

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