देशधर्म

भारत का वीआईपी पेड़ काैन सा है? आप भी जानिए

वृक्ष का सामान्य अर्थ ऐसे पौधे से होता है जिसमें शाखाएँ निकली हों, जो कम से कम दो-वर्ष तक जीवित रहे, जिससे लकड़ी प्राप्त हो।
वृक्ष की एक जड़ होती है जो प्रायः ज़मीन के अन्दर होती है, तथा जड़ से निकलकर तना तथा पत्तियां हवा में रहते हैं। यह प्रदूषण कम करने में कारगर सिद्ध हुआ है। पर लकड़ियो तथा ज़मीन की आवश्यकताओं के कारण लोग इसे काटते जा रहे हैं। वृक्ष हमें फल, लकडी ताजी हवा देते हैं।
यह किस्सा है मध्यप्रदेश के भोपाल और विदिशा के मध्य स्थित सलामतपुरा की पहाड़ी पर लगे पेड़ की। यह एक पीपल के पेड़ है जिसे किसी वीआईपी या किसी महानायक जैसी सुरक्षा का बंदोबस्त करना पड़ रहा है।
इस पेड़ को वर्ष 2012 में 21 सितंबर को श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने भारत आने के दौरान लगाया था।

क्यो है यह अति विशिष्ठ ( वीआईपी ) वृक्ष 

दरअसल यह एक बोधि वृक्ष है, जिसके नीचे भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। इसी कारण बौद्ध धर्म में बोधि वृक्ष का खास महत्त्व होता है।
तीसरी शताब्दी में बोधि वृक्ष की एक टहनी को भारत से श्रीलंका ले जाया गया था और उस टहनी को श्रीलंका के अनुराधापुरा में लगाया गया था। ऐसा कहा जाता है कि ये उसी बोधि वृक्ष की टहनी थी, जिसके नीचे महात्मा बुद्ध को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसलिए इस बोधि वृक्ष के महत्त्व को देखते हुए सरकार ने इसकी सुरक्षा के पूरे इंतजाम किये हैं। ताकि ये प्राचीन वृक्ष पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।
इस बोधि वृक्ष के पेड़ की सुरक्षा के खर्च पर आपको जानकर हैरानी होगी कि एक पेड़ की सुरक्षा पर लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। इस पेड़ की पर प्रतिवर्ष 12 से 15 लाख रूपये ख़र्च होते हैं। इस पेड़ की सुरक्षा में चार गार्ड लगे हुए है जो सातों दिन और आठों पहर यानि 24 घंटे इस पेड़ की देखभाल में खड़े रहते हैं। इस पेड़ के लिए विशेष तौर पर पानी के टैंकर की व्यवस्था भी की गई है।

 

Related Articles

Back to top button
Close